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बिहार के महागठबंधन सरकार के बनते ही कई भ्रस्ट अधिकारीयों पर गाज गिरा है। सरकार ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन विवाद से जुड़े मामलों में गड़बड़ी करने से लेकर अवैध तरीके से किसी दूसरे के नाम पर जमाबंदी कायम करने, विभागीय कार्य में लापरवाही बरतने वाले आठ सीओ पर कार्रवाई की है।

करवाई के अंदर दो सीओ को निलंबित भी कर दिया गया है। और बाकि 6 पर विभागीय कार्रवाई और वेतन वृद्धि रोकने का आदेश जारी किया गया है। इसमें कुछ सीओ ऐसे भी हैं, जिनके खिलाफ कुछ सालों से जांच रिपोर्ट की फाइल विभाग में दबी हुई थी। जो अब जाकर इन पर कार्रवाई होनी शुरू हुई है।

औरंगाबाद जिले के दाउदनगर सीओ विजय कुमार को उनके पद से निलंबित करने कारण अवैध जमाबंदी कायम कराकर दोहरी लगान रसीद जारी कराने और वरिष्ठ पदाधिकारियों को रिपोर्ट नहीं देने के आरोप में किया गया है। इन्होंने बाबूराम दुसाध के नाम से अवैध जमाबंदी कायम कर दी थी। साथ ही दोहरी लगान की रसीद भी जारी कर दी। और फिर इसकी जानकारी औरंगाबाद अपर समाहर्ता को नहीं दी। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय मगध प्रमंडलीय आयुक्त का कार्यालय निर्धारित किया गया है।

एसडीओ ने 9 मार्च 2021 को दाउदनगर अंचल का निरीक्षण किया था। तत्कालीन सीओ स्नेह लता देवी उस दौरान अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थीं। कार्यालय में बाहरी व्यक्ति ऑनलाइन कार्य करने के बदले लोगों से पैसे वसूल रहे थे। बिना कारण के दाखिल खारिज को अस्वीकृत किया जा रहा था। एसडीओ को मांगने पर भी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया। जनशिकायत के मामले भी काफी संख्या में लंबित थे। एसडीओ की इस निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को कार्रवाई के लिये पत्र लिखा था। अब उनको निलंबित कर दिया गया है।

● भागलपुर के रंगराचौक के तत्कालीन सीओ जितेंद्र प्रसाद राम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई चलाने से संबंधित आदेश जारी किया गया है। वर्तमान में रोहतास के शिवसागर के सीओ हैं। इनपर भागलपुर में पदस्थापन के दौरान कोविड-19 का नोडल पदाधिकारी रहते हुए संबंधित दायित्व का पालन नहीं करने के अलावा उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना, कर्तव्यहीनता, सरकारी कार्य में रुचि नहीं रखने समेत अन्य आरोपों के कारण विभागीय जांच के आदेश दिये गये हैं।

● बैंसा के सीओ राजनारायण राज की भी एक वेतन वृद्धि को रोक दी गयी है। बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत दायर परिवाद की सुनवाई में 9 अक्टूबर 2020 को उपस्थित होना था, लेकिन दो-दो बार बुलाये जाने के बाद भी वह सुनवाई को नहीं पहुंचे थे। इस पर इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गयी है।

● दरभंगा के बिरौल में सीओ रहे सूरज कांत की भी एक वेतन वृद्धि रोक दी गयी है। इसी जिले के ग्राम पोखराम के पवन कुमार ने गैर मजरूआ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिये वाद दायर किया था। अनुमंडल लोक शिकायत पदाधिकारी के आदेश पर भी अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया। बाद में डीएम के स्तर से भी आदेश दिया गया, लेकिन उसका भी पालन नहीं किया। 5 जनवरी 2018 को डीएम ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए विभाग को पत्र लिखा था। इस पर अब कार्रवाई हुई है।

● भागलपुर के ही जगदीशपुर के तत्कालीन सीओ संजीव कुमार की एक वेतन वृद्धि रोक दी गयी है। दाखिल खारिज आवेदनों के निस्तारण में मनमानी करने के लिये उनके खिलाफ जिले से 13 सितंबर 21 को ही अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की गयी थी।

● कटिहार के कुर्सेला में 2019 में सीओ रहे अमर कुमार वर्मा को भी एक वेतन वृद्धि पर रोक का दंड दिया गया है। वे सामूहिक सड़क दुर्घटना और प्राकृतिक आपदाओं के मामले में अभिलेख समय से उपलब्ध न कराने के लिये दोषी पाये गये थे।

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