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भारत में अपने कई तरफ के घोटाले देखे होंगे। कुछ घोटाले के मामले कोर्ट में चल रहे हैं तो कुछ घोटाले करने वाले देश छोड़ कर भाग गए हैं। इसमें देश के कई बड़े बड़े उद्योगपतियों का नाम शामिल है। और साथ ही देश के सत्ता धारियों का भी नाम इस लिस्ट में शामिल है। लेकिन बिहार के सारण जिले से एक ऐसा घोटाला सामने आया है कि प्रसाशन पूरी तरह से हैरान है। जो भी इस घोटाले के बारे में सुन रहा है वो अपनी हसी नहीं रोक पा रहा है। यह मामला सारण जिले के मांझी प्रखंड के हलखोरी साह उच्च विद्यालय में लड़कियों के लिए चलाई जा रही सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Napkin) और पोशाक योजना से जुड़ा हुआ है।

यहां लड़कियों के लिए चलाई जा रही सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Napkin) और पोशाक योजना का लाभ दर्जनों लड़कों को भी दिया गया है। प्रसाशन को हैरान करने वाला यह घाेटाला तब उजागर हुआ, जब विद्यालय के प्रधानाध्यापक के सेवानिवृत्त होने के बाद दूसरे प्रधानाध्यापक पदस्‍थापित ने पद संभाला।

सारण के इस सरकारी विद्यालय में लड़कियों के लिए चलाई जा रही सैनिटरी नैपकिन और पोशाक योजना का लाभ कई लड़कों को दिया गया। यह मामला तब सामने आया जब स्कूल में नए प्रधानााध्‍यापक के पद संभाला। नए प्रधानाध्यापक से जब शिक्षा विभाग ने पुरानी योजनाओं के उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगे, तब पाया गया कि करीब एक करोड़ रुपये की योजनाओं के उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किए गए हैं।

इसके बाद जब स्कूल के नए प्रधानााध्‍यापक द्वारा जांच शुरू की गई, तब बैंक स्टेटमेंट खंगालने पर पता चला कि लड़कियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की राशि दर्जनों लड़कों के खातों में भी ट्रांसफर की जाती रही है। इस जांच में यह भी पता चला कि लड़कियोें को दी जाने वाली सैनिटरी नैपकिन का लाभ भी दर्जनों लड़कों को भी दी जा रही है।

बता दें कि यह पूरा मामला बीते तीन वित्तीय वर्ष का है। उस वक़्त इस स्कूल में अशोक कुमार राय प्रधानाध्यापक के रूप में प्रस्थापित थे। घोटाला की जानकारी मिलने पर नए प्रधानाध्यापक रईस उल एहरार खान ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा, जिसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने जांच टीम का गठन कर दिया है। शिक्षा विभाग की ओर से इस विचित्र घोटाले की जांच शुरू कर दी है। DPO राजन गिरी ने बताया कि जांच चल रही है और जाँच में पाए जाने वाले सभी दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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