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पिछले 3 दिनों से बिहार सहित देश के कई राज्यों में सरकार द्वारा लाई गई ‘अग्निपथ’ योजना का विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में प्रदर्शनकारी कई जगहों पर आगजनी कर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन का सबसे बड़ा रूप बिहार में देखने को मिल रहा है। यहां उग्र प्रदर्शनकारी भारतीय रेलवे को अपना विरोध दिखाने के लिए सबसे आसान तरीका समझ रहे हैं। यह प्रदर्शनकारी बिहार के कई जिलों में दर्जनों भर ट्रेनों की बोगियों को अब तक जला चुके हैं। और इसी बीच शुक्रवार, 17 जून को यह ऐलान हुआ कि 18 जून को बिहार बंद रहेगा।

ट्रेनों में आगजनी और रेलवे परिसर में शुक्रवार को हुए उपद्रव को देखते हुए रेलवे ने 18 जून को कुल 315 ट्रेनों को रद्द कर दिया है। गुरुवार को बिहार भर में कई ट्रेनों को उपद्रवियों ने निशाना बनाया और आग के हवाले कर दिया। ट्रेनों में कई बोगियों में यात्री भी सवार थे और उनके साथ मारपीट भी की गई। आगजनी और मारपीट से हजारों यात्री परेशान और रोते-बिलखते दिखे। इसे को देखते हुए यह फैसला लिया कि 18 जून को 315 ट्रेनों को रद्द कर दिया। रद्द हुई ट्रेन पूर्व मध्य रेलवे के अलग-अलग स्टेशनों से खुलती, गुजरती या फिर इनका बिहार के स्टेशनों पर समापन होता है।

मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, कोलकाता जाने वाले हजारों यात्री पटना में फंसे हुए हैं। ट्रेनों के रद्द हो जाने से कई यात्री काफी समस्या का सामना कर रहे हैं। 17 जून को हुए उपद्रव के बाद रेलवे परिसरों की सुरक्षा भी पहले से काफी ज्यादा बढ़ा दी गई है। जगह-जगह भारी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती कर रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा की जा रही है।

राजधानी पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल, पटना जंक्शन, पाटलिपुत्र जंक्शन, दानापुर में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है। देर रात आला अधिकारियों ने बैठक कर रेल संपत्ति और रेल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर व्यापक रणनीति बनाई है। उपद्रवियों की पहचान करने के लिए रेल परिसरों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराए जाने का निर्णय लिया गया है।

आपको बता दें बिहार में इस प्रदर्शन को लेकर कई युवाओं को गिरफ्तार भी किया गया है। और कई एफआईआर भी दर्ज किए गए हैं।

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