नेपाल के सुनसरी जिले के बुर्ज ताल में बुर्ज महोत्सव का आयोजन किया जा रहा था। नेपाल के विराटनगर में उनका कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम के अंतिम दिन खेसारीलाल यादव (Khesari Lal Yadav) का कार्यक्रम रखा गया था। उनके कार्यक्रम का व्यापक प्रचार भी हुआ था। ऐसे में उनके कार्यक्रम को देखने के लिए कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही भीड़ जुटने लगी थी। हालांकि, जब खेसारीलाल यादव कार्यक्रम में नहीं आए और इस बात का पता जैसे ही लोगों को चला, उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। कुर्सियां तोड़ दी गईं।
खेसारी लाल के इंतजार में सुबह से बैठे लोगों को जब पता चला कि वे नहीं आएंगे तो लोग आग-बबूला हो गए और उन्होंने हिंसा शुरू कर दी। उग्र भीड़ ने सैकड़ों कुर्सियों के साथ चार स्कॉर्पियों को आग के हवाले कर दिया।
घटना के बाद खेसारी लाल यादव ने फेसबुक लाइव आकर पूरी बात बताई। उन्होंने कहा कि वे शो करने के लिए निकलते इससे पहले ही नेपाल पुलिस ने उन्हें होटल के बाहर घेर लिया। उन्होंने कहा कि आप कार्यक्रम नहीं कर सकते हैं। जब उन्होंने इसके बारे में डिटेल जानी तो पता चला कि इसमें जनता या प्रशासन का कोई दोष नहीं है। कोरोना गाइडलाइन की वजह से कार्यक्रम की अनुमति नहीं थी। ऐसे में आयोजक को बताना चाहिए था। उन्होनें कहा कि इतना सब होने के बावजूद मुख्य आयोजक श्रवण चौधरी उनसे मिलने नहीं आया।
खेसारी यादव ने कहा कि जनता को लग रहा होगा कि मैं नहीं आया जबकि ऐसा नहीं है। मैं 24 घंटे काम करने वाला व्यक्ति हूं। मेरा डेढ़ करोड़ रुपए का नुकसान हो गया। लड़कियों को चोट पहुंची है। टीम के अन्य लोगों को भी चोट लगी है। इसमें ना तो जनता और ना ही प्रशासन की गलती है। सरकार ने जब दो दिन पहले अनुमति रद्द दी थी तो आयोजक को जनता और उन्हें यह बात बतानी चाहिए थी। आखिर में खेसारी लाल यादव ने जनता से माफी मांगी क्योंकि वे नेपाल आकर भी उनके बीच नहीं आ सके।
