बिहार में जहां एक तरफ मानसून महीने में मानसून की किल्लत हो रही है, प्रदेश में बिजली की कटौती से कई गाँव और शहर परेशान है। क्योंकि एनटीपीसी की तीन इकाइयों के बंद होने से राज्य में बिजली की किल्लत हो रही है। लोगों को उनके मांग से तकरीबन 800 मेगावाट बिजली कम मिलने के कारण राज्य के दर्जनों ग्रिड को लोडशेडिंग में रखना पड़ रहा है।
एनटीपीसी ने प्रदेश भर में रोटेशन के आधार पर बिजली देने की पूरी कोशिश कर रही है। लेकिन प्रदेश के शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में 7 से 8 घंटे तक बिजली की कटौती हो रही है। एनटीपीसी अधिकारियों ने इस बिजली करती के बारे में बताया की एनटीपीसी की नवीनगर यूनिट से एक-दो दिन उत्पादन होने के बाद फिर बंद हो गया। जिस कारण बिहार को 525 मेगावाट बिजली कम हो गई।
इसके साथ ही बरौनी की यूनिट संख्या छह से उत्पादन बंद होने के कारण 97 मेगावाट बिजली कम हो गई। वहीं ओड़िशा की दरीपल्ली यूनिट बंद होने के कारण 90 मेगावाट बिजली कम मिली। अन्य यूनिटों से भी पूरा उत्पादन नहीं हुआ। इस कारण बिहार को केंद्रीय सेक्टर से तय कोटा से 800 मेगावाट तक कम बिजली मिली रही है।
इसके बाद एनटीपीसी ने खुले बाजार से बिजली खरीद कर देर रात 8 बजे के करीब 5711 मेगावाट की आपूर्ति की। लेकिन यह प्रदेश के लिए काफी नहीं रहा, क्योंकि बिहार में बिजली की किल्लत के साथ साथ बारिश की भी किल्लत है। जिस कारन प्रदेश भर में उमस और गर्मी लोगों को परेशान कर रही हैं। जिस कारण बिजली की खपत में कोई कमी नहीं आ रही है। भीषण गर्मी का परिणाम है कि 15 जुलाई को कंपनी ने 6138 मेगावाट बिजली आपूर्ति की। इसके बावजूद 1106 मेगावाट की किल्लत रही।
बिजली के कम उत्पादन के कारण कंपनी ने शहरी व अर्धशहरी इलाकों को प्राथमिकता देते हुए शहरी इलाकों में 20 घंटे से अधिक बिजली दी जा रही है। वहीं अर्धशहरी इलाकों में 18 घंटे से अधिक बिजली दी जा रही है। जबकि ग्रामीण इलाकों में कम से कम 16 घंटे बिजली देने की कोशिश की जा रही है। लेकिन आपको बता दें कि कृषि फीडर को रात में आठ घंटे बिजली दी जा रही है, जिससे किसानों को खेती में परेशानी न हो सके।
