बुधवार की सुबह रोहतास जिले के कोचस प्रखंड में बिल्कुल सामान्य थी। धान की कटाई अपने चरम पर थी, खेतों में दरांतियों की आवाज गूंज रही थी और किसान अपनी रोज़मर्रा की मेहनत में डूबे हुए थे। लेकिन ठीक इसी शांति के बीच अचानक एक सनसनी फैल गई। कैमु‍र वाइल्डलाइफ सेंचुरी के जंगलों से भटककर आया एक वयस्क तेंदुआ चुपचाप धर्मावती नदी के बांधों से उतरकर खेतों में जा पहुंचा। किसान प्रदीप कुमार को शायद ही अंदाजा रहा हो कि उसी पल उनकी जिंदगी का सबसे खतरनाक सामना होने वाला है। ज़रा सी आहट के बाद तेंदुए ने उन पर छलांग लगा दी और कुछ ही सेकंड में विशाल खेत चीखों से भर गया।

किसानों में भगदड़, तेंदुआ लगातार हमलावर

प्रदीप के बाद तेंदुए ने बिना किसी रोक-टोक के मनोज ओझा और राम प्रवेश सिंह पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि जानवर बेहद तेज था और हड़बड़ाहट में किसी पर भी झपटने को तैयार था। खेतों में मौजूद मजदूर और किसान जान बचाने के लिए चारों ओर दौड़ पड़े। कई लोग चिल्लाते हुए गांव की ओर भागे, जबकि कुछ ने मोबाइल पर परिवारों को कॉल करके बताया कि खेतों में “बड़ा जानवर घुस आया है।” कुछ ही मिनटों में यह खबर आसमान की तरह फैल गई और सैकड़ों लोग मौके पर जमा होने लगे।

घबराया हुआ तेंदुआ लगातार पीछे हटता गया और भीड़ के दबाव में पावर हाउस की ओर दौड़ पड़ा। NH-319 पार करते समय कई बाइक सवारों ने ब्रेक लगाकर अपनी जान बचाई। फिर वार्ड नंबर 3 की गलियों में कदम रखते ही पूरे बाजार में अफरा-तफरी मच गई। दुकानदार शटर गिराने लगे, महिलाएँ बच्चों को खींचकर घरों के अंदर ले गईं और कुछ लोग छतों पर चढ़कर स्थिति देखने लगे। यह पहली बार था जब कस्बे के घने इलाके में कोई जंगली जानवर इतनी तेजी से प्रवेश कर गया था।

भीड़ के लगातार शोर से तेंदुए की बेचैनी बढ़ी

DFO स्टालिन फिडाल कुमार और उनकी टीम ने मौके पर पहुँचकर भीड़ को हटाने की कोशिश की, लेकिन तमाशबीनों की संख्या बढ़ती ही गई। टीम के बीच यह चिंता थी कि इतनी अधिक भीड़ तेंदुए को बेकाबू कर सकती है। और वही हुआ—घबराए हुए तेंदुए ने नजीर हुसैन, मोहम्मद एकराम, राज कुमार और अजय कुमार पर हमला कर दिया। भीड़ के एक कोने में खड़े संतोष प्रसाद पर जब तेंदुआ झपटा, तो उसका हमला सबसे भयावह साबित हुआ। तेंदुए ने उनके सिर से लेकर गर्दन और शरीर तक में 40 से ज्यादा जगह पंजे और दांत मार दिए। उन्हें खून से लथपथ हालत में लोगों ने किसी तरह बाहर निकाला।

अधनिर्मित मकान में घुसा तेंदुआ, रेस्क्यू टीम ने बनाया रणनीतिक घेरा

करीब डेढ़ घंटे की भागदौड़ के बाद तेंदुआ वार्ड नंबर 3 के एक अधनिर्मित मकान में जा घुसा। यह रेस्क्यू टीम के लिए महत्वपूर्ण मौका था, क्योंकि अब जानवर एक सीमित जगह में था। टीम ने तुरंत चारों दिशाओं से जाल और बैरिकेड्स लगाना शुरू किया। इस प्रक्रिया में हर सेकंड जोखिम से भरा था—क्योंकि तेंदुआ थोड़ी सी आवाज पर भी उग्र होकर बाहर छलांग मार सकता था। टीम ने तेंदुए को भटकाने के लिए स्टिक-नॉइस डिवाइस, शील्ड और सेफ्टी नेट का इस्तेमाल किया। स्थानीय लोगों को बार-बार पीछे हटने की चेतावनी दी गई, लेकिन भीड़ के कई हिस्से लगातार हल्ला मचाते रहे, जिससे जानवर की बेचैनी चरम पर पहुंच गई।

जब रेस्क्यू टीम जाल डाल रही थी, तभी तेंदुआ अचानक बिजली की रफ्तार से बाहर निकला और वनरक्षक संतोष साह, राजीव कुमार और विवेक कुमार पर टूट पड़ा। टीम के सदस्यों ने शील्ड से खुद को बचाया, लेकिन फिर भी उन्हें गहरी चोटें आईं। इसके बावजूद रेस्क्यू ऑपरेशन रुका नहीं। डीएफओ और उनकी टीम ने दबाव में आए बिना जानवर को फिर से घेरने की कोशिश की।

तीन घंटे की जद्दोजहद के बाद सफलता

करीब तीन घंटे की टेंशन, खतरे और लगातार रणनीति बदलने के बाद तेंदुआ आखिरकार जाल में फंस गया। उसे पकड़ने के बाद टीम ने बड़ी सावधानी से पिंजरे में डाला, क्योंकि घायल और घबराया हुआ तेंदुआ किसी भी क्षण फिर से हमला कर सकता था। शाम तक पूरा ऑपरेशन सुरक्षित रूप से पूरा हुआ। इलाके में राहत की सांस ली गई, लेकिन लोगों के चेहरे पर दिनभर की दहशत साफ दिखाई दे रही थी। सभी 11 घायलों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि किसी की जान को फिलहाल खतरा नहीं है, लेकिन कुछ को गहरी चोटें हैं और दो लोगों को आगे बेहतर इलाज की जरूरत हो सकती है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टीम के घायल सदस्य भी अब खतरे से बाहर हैं।

पकड़े गए तेंदुए को राजगीर के वाइल्डलाइफ रेस्क्यू सेंटर भेजा जाएगा, जहाँ उसका इलाज व आवश्यक निगरानी की जाएगी। वन विभाग अब यह जांच करने वाला है कि तेंदुआ सेंचुरी से इतना दूर आबादी वाले क्षेत्र में कैसे भटक आया। प्रारंभिक अनुमान यह है कि इलाके में भोजन की कमी और लगातार जंगलों में मानव गतिविधि बढ़ने के कारण जंगली जानवर आबादी की ओर बढ़ रहे हैं।

कोचस में हुई यह घटना अकेली नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई हिस्सों में तेंदुए, भालू और हाथियों से मानव टकराव के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस हादसे ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि न सिर्फ जंगल सिकुड़ रहे हैं, बल्कि इंसानी बस्तियाँ भी वन्यजीवों के पुराने रास्तों में खड़ी हो गई हैं। परिणामस्वरूप दोनों के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है, और इसका सबसे बड़ा खामियाजा ग्रामीण क्षेत्रों को भुगतना पड़ रहा है।