बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने के फैसले के लिए मंगलवार को केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया।

तेजस्वी यादव ने ‘एक्स’ पर अपने एक पुराने भाषण का वीडियो साझा करते हुए कहा “वंचित,उपेक्षित और उत्पीड़ित वर्गों के पैरोकार,महान समाजवादी नेता एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर जी को ‘भारत रत्न’ देने की हमारी दशकों पुरानी मांग पूरी होने पर अपार खुशी हो रही है। इसके लिए केंद्र सरकार को साधुवाद।

जननायक’ के तौर पर विख्यात कर्पूरी ठाकुर पहले गैर-कांग्रेसी समाजवादी नेता थे जो दिसंबर 1970 से जून 1971 तक और दिसंबर 1977 से अप्रैल 1979 तक दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे।
अब जानना यह जरूरी है कि तेजस्वी यादव के इस धन्यवाद के मायने क्या हैं? क्योकि कहा ये जा रहा है कि इस सम्मान की मांग बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने मुख्यमंत्रित्व काल के पहले चरण यानि 2007 से हीं करते आये हैं और इसका श्रेय सिर्फ़ और सिर्फ़ नीतीश कुमार को हीं मिलना चाहिए |

कुछ ही महीनों में लोकसभा चुनाव है और कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने को चुनाव से सीधा जोड़ा जा रहा है| कर्पूरी ठाकुर बिहार की अति पिछड़ी जाति नाई से ताल्लुक रखते थे| बिहार में अति पिछड़ी जातियां सबसे बड़ा जातीय समूह है|जो हाल हीं में हुए जातीय सर्वेक्षण में भी स्पष्ट हो चूका है|

बीते साल दो अक्तूबर को बिहार सरकार ने जातिगत सर्वेक्षण के आंकड़े जारी किए थे | इसके मुताबिक़ बिहार की कुल आबादी क़रीब 13 करोड़ है और इनमें सबसे अधिक संख्या अत्यंत पिछड़ा वर्ग की है| ये राज्य की आबादी के करीब 36 फ़ीसदी हैं| इसके बाद दूसरी सबसे बड़ी आबादी पिछड़ा वर्ग की है,जो राज्य में 27.12 फ़ीसदी आबादी रखते हैं|

जातिगत सर्वे को कांग्रेस सहित अधिकांश विपक्षी दलों ने समय की ज़रूरत बताया और जितनी आबादी उतना हक़ जैसे नारे दिए| नीतीश कुमार की सरकार ने सर्वेक्षण के बाद एक और बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 75 फ़ीसदी कर दिया| बिहार के ओबीसी वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा अब तक लालू यादव और नीतीश कुमार की पार्टियों के ही साथ रहा है|

अब यही होड़ लगी है कि आख़िरकार बिहार की राजनीति की केंद्रीय धुरी बनी अत्यंत पिछड़ी जाति का असली रहनुमा कौन है? और यही वज़ह है कि पार्टियों के पुरोधा बहती गंगा में हाथ धोने की भरपूर कोशिश में हैं ताकि लोक सभा चुनाव और विधान सभा चुनाव में कोई कसर न रह जाए |