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जहाँ का लहजा थोड़ा ठंडा और बातें गरम सी लगती हैं, जहाँ गंगा, यमुना, सोन जैसी नदियां, अपनी कल-कल बहती धाराओं से भूमि को पवित्र करती हैं, जहाँ दुनिया का सातवाँ अजूबा कहे जाने वाला ताजमहल स्थित हैं, उस उत्तर प्रदेश की भूमि पर फिर से एक नया कीर्तिमान स्थापित होने जा रहा है। भगवान बुद्ध ईश्वर के अवतार माने जाते हैं। उनका जन्म दुनिया के कल्याण के लिए हुआ था। भारत में उन्होंने ज्ञान प्राप्त की और इसी धरती पर उन्होंने अंतिम सांस भी ली। उत्तर प्रदेश का कुशीनगर गौतम बुद्ध के आखिरी दिनों की सारी यादें समेटे हुए है। इसी धरती पर आज लोगों को सौगात मिली है। दरअसल, आज कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया गया है। यह एयरपोर्ट, दुनियाभर के बौद्ध धर्म के तीर्थयात्रियों को बौद्ध तीर्थस्थलों से जोड़ेगा।

उत्तर प्रदेश में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। ये एयरपोर्ट घरेलू और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्रियों को भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल पर जाने की सुविधा देगा। इस एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा एयरपोर्ट वाला प्रदेश बन गया है। ये एयरपोर्ट ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ को प्रोत्साहित करेगा। 260 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया ये एयरपोर्ट लगभग 590 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है और वर्ल्ड क्लास फैसिलिटीज से लैस है। इसे Airports Authority of India (AAI) ने उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से बनाया है।

कुशीनगर एक अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थस्थल है जहां भगवान गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था, यानी की यहीं पर उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली थी। इस एयरपोर्ट से उत्तर प्रदेश और बिहार के आस-पास के जिलों को भी लाभ होगा और साथ ही क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का रनवे 3 हजार 200 मीटर किमी लंबा और 45 मीटर चौड़ा है, जो यूपी का सबसे लंबा रनवे है। इस एयरपोर्ट का नया टर्मिनल 3600 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है जिसका निर्माण 5 महीने के रिकॉर्ड समय में किया गया है। इस टर्मिनल में एक समय में 300 यात्रियों की प्रबंधन की क्षमता है। भारत में चार मेन बौद्ध तीर्थ स्थान हैं और कुशीनगर उनमें से एक है। इसके अलावा बोधगया, श्रावस्ती और सारनाथ हैं। इसके साथ ही बौद्ध तीर्थयात्रा के लिए पांचवां महत्वपूर्ण स्थान लुंबिनी नेपाल में स्थित है और यह कुशीनगर के करीब है। इस कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जापान, चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, सिंगापुर, वियतनाम समेत दर्जनों दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से सीधी एयर कनेक्टिविटी मिलेगी।

छठी शताब्दी से पहले, भारत में धर्म और वेदों की शिक्षाओं को भूला दिया गया था। हर जगह जब अराजकता ही अराजकता फैली थी, तब ऐसे समय में लाइट ऑफ एशिया के नाम से विख्यात गौतम बुद्ध का जन्म दीन-दुखियों के कल्याण के लिए हुआ था। मुख्य चार जगहों का बुद्ध के जीवन से सीधा संबंध रहा है। लुंबिनी में उनका जन्‍म हुआ, बोधगया में उन्‍हें ज्ञान की प्राप्ति की, सारनाथ में उन्‍होंने पहली बार उपदेश दिया और कुशीनगर में उन्‍होंने अंतिम सांस ली।

इतिहास के पन्नों में यदि हम झांकते हैं तो हमें पता चलता है की कुशीनगर कभी मल्ल वंश की राजधानी हुआ करता था, जिसका जिक्र चीनी यात्री ह्वेनसांग और फाहियान के यात्रा वृत्तांतों में भी मिलता है। आज का कुशीनगर कभी कौशाला राजवंश का हिस्‍सा हुआ करता था, जिसके मुताबिक ये भगवान श्रीराम के पुत्र कुश की राजधानी हुआ करती थी। कुशीनगर केवल भगवान राम और बुद्ध से ही नहीं जुड़ा है बल्कि मौर्य काल, शुंगा, कुषाण, गुप्‍त, और पाल वंश से भी इसका गहरा नाता रहा है।

इस कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से नवंबर में नियमित उड़ान शुरू हो जाएगी। दिल्ली और कुशीनगर के बीच की डायरेक्ट फ्लाइट की शुरुआत 26 नवंबर से होगी तो वहीं 18 दिसंबर को कुशीनगर से मुंबई और कोलकाता की फ्लाइट जोड़ी जाएगी। भारत, विश्व भर के बौद्ध समाज की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। जाहिर सी बात है की जब ये एयरपोर्ट शुरू होगा तो दुनियाभर के बौद्ध धर्म के तीर्थयात्रियों को बौद्ध तीर्थस्थलों से जुड़ने में बहुत सहूलियत मिलेगी।

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