बिहार में महागठबंधन के भीतर अब दो-दो हाथ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कल पूर्व सांसद पप्पू यादव ने आशंका जताई थी की बिहार उपचुनाव के लिए राजद और भाजपा के भीतर अंदरूनी गठबंधन की खिचड़ी पक रही है ऐसे में कांग्रेस को उससे अलग हो जाना चाहिए। ऐसे में लगता है की पप्पू यादव की आशंका को कांग्रेस ने कुछ ज़्यादा ही गंभीरता से ले लिया तभी तो पूर्व सांसद के रिहा होते ही उन्हें चुनाव लड़ने का ऑफर दे डाला। कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित सिंह ने बताया की राजीव रंजन उर्फ़ पप्पू यादव जेल से रिहा हो चुके हैं और अगर वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने पर सहमति बनाते हैं तो पार्टी इसपर विचार करने को तैयार है। अब यह तो उनके ऊपर निर्भर है की वह क्या चाहते हैं बहरहाल पार्टी उनसे लगातार संपर्क में है।
कल खबर आई थी की बिहार में होने वाले कांग्रेस की खाते वाली दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर उनके साथी राजद ने भी अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं। इसे लेकर अब कांग्रेस राजद पर लगातार हमलावर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विधायक शकील अहमद खान ने कहा की दोनों सीटों पर राजद ने अपने प्रत्याशी उतार कर भाजपा के खिलाफ कांग्रेस की मुहीम को कमज़ोर किया है। ऐसे में अब कांग्रेस भी अपने हित का सोचते हुए कोई भी फैसला ले सकती है। जदयू से नज़दीकियां बढ़ाने का संकेत देते हुए विधायक ने कहा की जब हम जदयू के साथ थे तो हमारा स्ट्राइक रेट बेहतर था। जो लोग समीकरण की बात करते थे अब उनके समीकरण का क्या हुआ। जदयू के साथ जाने के सवाल पर शकिल अहमद ने कहा की अगर जदयू भाजपा से अलग होकर कांग्रेस के साथ आना चाहते हैं तो कांग्रेस के दरवाज़े उनके लिए हमेशा खुले हैं।
पुरे प्रकरण पर राजेश रंजन की पत्नी और पूर्व सांसद रंजीत रंजन ने कहा की सम्मान एकतरफा नहीं होता दोनों तरफ से होना चाहिए। हमारी पार्टी और राहुल गांधी का फोकस हर प्रदेश का सम्मान ही नहीं बल्कि कांग्रेस का सम्मान करने वाले लोगो को इससे जोड़ना होता है परन्तु गठबंधन के कारण हम बहुत पीछे हो जाते हैं। इसलिए कांग्रेस से प्यार करने वाले लोग हमारे साथ आगे नहीं बढ़ पाते हैं।कांग्रेस प्रदेश को कैसे विकास के रास्ते पर लेजा सकती है इसपर विचार हो रहा है और यह हम करके दिखाएंगे। कन्हैया कुमार के पार्टी में आने के सवाल पर कहा कि गठबंधन में किसको आपत्ति है, यह उनकी सोच है। उस पर हमें कुछ नहीं कहना।

