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जब भी देश में सरकार आम लोगों से जुड़ी योजना चलाती है तो उससे जनता को कितना फायदा हुआ ये देखा जाता है। इन योजनाओं से आम जनता को लाभ तो पहुँचता है लेकिन नेताओं के रिश्तेदारों की भी चांदी हो जाती है। ऐसा ही कुछ वाकिया बिहार से सामने आया है। प्रदेश सरकार की ‘हर घर नल का जल’ योजना पर सवाल उठने लगे हैं। इस योजना से प्रदेश की आम जनता को तो फायदा पंहुचा लेकिन भाजपा विधायक दल के नेता और डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद के परिवार वालों और सहयोगियों को 53 करोड़ के ठेके भी मिले।

सरकारी योजनाओं का लाभ नेताओं के परिवार वालों को मिलना यह नितीश कुमार की गुड गवर्नेंस वाले दावे पर पानी फेरने वाला काम करता है। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिये फायदा लेने वाली लिस्ट में सबसे पहला नाम बिहार के डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद का है। लिस्ट में कुछ जदयू और भाजपा नेताओं के भी नाम हैं।

अंग्रेज़ी अखबार ने खबर को छापते समय पड़ताल की थी। सबसे पहले बिहार में चलाई जा रही ‘हर घर नल का जल’ योजना के 20 जिलों से जुड़े दस्तवेज़ देखे। इन सबको रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनी और बिहार पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डेपार्टमेंट के रिकॉर्ड से मिलाकर देखा गया। PHED को इस योजना को लागु करने का ज़िम्मा दिया गया था और इसमें पंचायती राज और शहरी विकास विभाग को इसमें उसका साथ देना था। खबर के मुताबिक 2019-20 में PHED ने कटिहार जिलें की 9 पंचायतों के अलग अलग वार्ड में योजना से जुड़े कुल 36 प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी गई थी। कटिहार से ही डिप्टी सीएम तार किशोर प्रसाद चार बार विधायक रहे हैं। PHED द्वारा ये प्रोजेक्ट जिन कंपनियों को दिए गए उनमे तार किशोर प्रसाद की बहु और कई रिश्तेदार शामिल है।

सबसे ज़्यादा बवाल तार किशोर प्रसाद की बहु पूजा कुमारी की कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट मिलने पर मचा क्योंकि उनकी कंपनी को इस क्षेत्र में काम करने का अनुभव ही नहीं है। जब इस सापेक्ष में तार किशोर प्रसाद से पूछा गया तो उन्होंने कहा की कॉन्ट्रैक्ट्स के आवंटन के समय किसी तरह का राजनितिक संरक्षण नहीं दिया गया। जब कॉन्ट्रैक्ट बांटें गए थे तो उस समय वे कटिहार से सांसद थे और वे डिप्टी सीएम साल 2020 में बने है। सीधे तौर पर उनका इन कमापनियों से कोई लिंक नहीं है।

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