fisheres businessfisheres business

राज्य के मछुआरों को मछलीपालन के लिए 90 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। इसमें नए तालाब निर्माण, पुराने का जीर्णोद्धार, हैचरी निर्माण, बोरिंग, फिश फिड मिल व पंपसेट सहित मछलीपालन से जुड़े सभी योजनाओं पर अनुदान मिलेगा। अनुदान में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव पशु व मत्स्य संसाधन विभाग ने तैयार कर लिया है। जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी के बाद इसे 2019-20 सत्र से लागू कर दिया जाएगा।

इस योजना से एक लाख से अधिक मछुआरों को लाभ होगा। इसके पहले मछुआरों को सामान्य मछली पालकों की तरह ही 40 प्रतिशत ही अनुदान मिल रहा था। नीली क्रांति योजना के तहत केंद्र सरकार 40 प्रतिशत अनुदान देती है। इसमें राज्य सरकार 50 प्रतिशत राशि अपनी ओर से देगी। 8 से 10 टन फिश फिड उत्पादन वाला बड़ा फिश फिड मिल के लिए एक करोड़ लागत मूल्य है। इसमें 90 लाख रुपए सरकार अनुदान देगी। 10 लाख की लागत वाला छोटा फिश फीड मिल के लिए सरकार 9 लाख रुपए अनुदान देगी।

चौर एरिया में मछलीपालन और मछली जीरा संग्रह के लिए भी अनुदान दिया जाएगा। अभी नया तालाब बनाने के लिए 40 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना के लागू होने से राज्य में मछली का उत्पादन बढ़ेगा। वर्तमान में राज्य में सालना लगभग 50 से 60 हजार टन मछली आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल से आयात करना पड़ता है। कॉफ्फेड के एमडी ऋषिकेश कश्यप का कहना है कि एससी-एसटी की तर्ज पर मछुआरों को मछलीपालन के लिए 90 प्रतिशत अनुदान मिलने से राज्य के लाखों मछुआरों को लाभ मिलेगा। मछुआरों की आमदनी बढ़ने के साथ ही राज्य में मछली उत्पादन भी बढ़ेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *