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पटना के शहरी इलाकों में बाढ़ का पानी कम होने से शहरवासियों को थोड़ी राहत मिली तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह रहे लोग का बाढ़ के पानी ने जीना दुश्वार कर दिया है। पटना में गंगा, सोन और पुनपुन नदी के जलस्तर में कमी आयी है। बुधवार को पटना के गाँधी घाट में गंगा का पानी 10 सेंटीमीटर के नीचे चला गया। वहीँ पुनपुन और सोन नदी का जलस्तर 55 और 28 सेंटीमीटर नीचे चला गया। हालांकि अभी भी सभी नदियां खतरे के निशाँ से उअप्र बह रही है लेकिन सिचाई विभाग का कहना है की वाराणसी और प्रयागराज में गंगा का पानी घटने से आने वाले दिनों में पटना में भी गंगा का पानी और घटेगा।

बात करें बिहार के अन्य क्षेत्रों तो पूर्वी बिहार में बाढ़ की स्थिति अब भी भयावह बनी हुई है। गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में वृद्धि हो रही है। भागलपुर शहरी क्षेत्र और कहलगांव के बाद बुधवार को नवगछिया में भी पानी घुस गया। नवगछिया में गंगा और कोसी का पानी चारों तरफ फैलने लगा है। कोसी नदी का पानी नवगछिया बाजार की खरनयी नदी में गिर रहा है। इससे नवगछिया बाजार में भी लोगों की परेशानी बाढ़ सकती है। कटिहार के मनिहारी रेलखंड पर बुधवार को पानी चढ़ गया है। इस रेलखंड पर अभी एकमात्र जानकी एक्सप्रेस चलती है। एडीआरएम ने बताया कि रेलवे स्थिति पर नजर रख रही है।

भागलपुर शहरी क्षेत्र में बाढ़ के लोगों की परेशानी कम नहीं होती दिख रही है। कई लोग सगे-संबंधियों के यहां शरण लिए हुए हैं तो कई लोग छत या ऊपर की मंजिल पर रह रहे हैं। बाढ़ राहत शिविरों में प्रशासन की ओर से लोगों की मदद की जा रही है। अधिकारी लगातार शिविरों का जायजा ले रहे हैं। हालांकि, प्रशासनिक बाढ़ पीड़ितों के लिए नाकाफी साबित हो रही है। अररिया के पलासी प्रखंड होकर बहने वाली बकरा नदी के जलस्तर में बुधवार को तीसरे दिन भी कोई कमी नही आई। कुछ सेमी की बढ़ोतरी ही हुई है। अभी भी निचले इलाके के आधा दर्जन गांव में बकरा का पानी फैला हुआ है। वही पिछले 24 घंटे के अंदर रतवा नदी का कटाव तेज होने से एक दर्जन घर नदी में समा गए। कई घरों पर अभी भी कटाव का खतरा मंडरा रहा है।

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