PETROL BIHARPETROL BIHAR

पिछले 1 साल से पेट्रोल और डीज़ल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे है, मई 2020 से यह सिलसाल शुरू हुआ था और अब 2021 में जाकर क़ीमत 100 के सिमा को भी पार कर लिया है।

पहला और सबसे प्रमुख कारण- सरकार अपनी खपत से 4 /5 % फ्यूल का उत्पाद करती है जिसके कारणवर्ष बाहरी देशो में क़ीमत की वृद्धि होती है और फिर भारत में भी पेट्रोल और डीजल के खुदरा मुल्य (retail price) में वृद्धि हो जाती है। केंद्र सरकार के ओर से फ्यूल पर लगाए जाने वाले टैक्स पिछले 7 सालो में 300% से भी ऊपर जा पहुँचा है। रिपोर्ट्स की माने तो केंद्र सरकार को इतने सालो में पेट्रोल और डीज़ल से काफ़ी मुनाफा हुआ है। 2014-15 के बाद फिलहाल 2020-21 के अर्थव्यवस्था कि तुलना की जाये तो उद्पाद शुल्क के द्वारा दोगुनी हो गया है।

दूसरा प्रमुख कारण- चूँकि सरकार ने कम क़ीमत वाले कच्चे तेल की अवधि के दौरान उपभोक्ताओं को लाभ नहीं दिया, इसलिए अब राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती है। पिछले साल तक कच्चे तेल की औसत क़ीमत 3247.46 रुपए प्रति बैरल थी जो अब 2021 में 5637. 92 प्रति बैरल हो गया है। बात करें पिछले एक साल में हुए बदलाव कि तो, पिछले साल मई के महीने से पेट्रोल की केंद्रीय उत्पाद शुल्क 22.98 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 32.98 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। वहीँ डीजल की बात करें तो उत्पाद शुल्क 18.83 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 31.83 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था।

मार्च 2021 में पार्लियामेंट में नई बजट पेश करते वक़्त देश की वित्त मंत्री निर्मला सीथारामन ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए जीएसटी में जोड़ने की बात उठाई थी। जिसपर बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशिल कुमार मोदी का कहना था कि अगर फ्यूल को जीएसटी में रखा जायेगा तो इससे राज्यों को कई लाख करोड़ के आये में नुक्सान सहना होगा। केंद्र व राज्य प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख करोड़ का मुनाफ़ा कमाती है सिर्फ़ फ्यूल के टैक्सेज से। वहीँ साथ ही में पूछे जाने पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विश्व भर में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के कारण ही भारत में भी क़ीमत बढ़ रही है। केवल 2019-20 से 2020-21 तक में पेट्रोल टैक्सेज में करीबन 67 प्रतिशत उछाल आयी है।

सरकार का अलग-अलग दावा और अलग-अलग बयान आ रहे है लेकिन किसी ने भी देश के निवासियों के प्रति आ रहे समस्याओ पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है। कोरोना काल में आर्थिक स्थिति से जुज रहे लोगों को फ्यूल के लिए जेब ख़र्च करना काफ़ी मुश्किल हो रहा। लोगों का कहना है कि तेल से हो रहे सारे मुनाफे सरकार के जेब में जा रहे। रिपोर्ट्स के अनुसार कोरोना महामारी में 1 करोड़ लोगों की नौकरी गयी है और लगभग आधी आबादी पहले से और ग गरीब हो गयी है। इस दौरान बढ़ते पेट्रोल-डीजल के क़ीमत से आने वाले महीनो में महंगाई और भी बढ़ जाएगी।

इसी दौरान बिहार के राजनीती स्तर पर पेट्रोल डीजल को लेकर काफ़ी विवाद उठ रहे। एक-एक कर हर पार्टी रैली निकल रही है। फिलहाल कांग्रेस समर्थ महंगाई को लेकर पटना जिले में रोड प्रदर्शन कर रहे है। वही तेजस्वी यादव ने बयान दिया है कि “कच्चा तेज सस्ता होता जा रहा है जबकि डीजल-पेट्रोल की कीमतें दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। अच्छे दिन की जगह अब बुरे दिन ला दिया गया है सरकार ने।” बिहार के प्रखंड स्तर पर 18 से 19 जुलाई RJD आंदोलन करेगी।

देखें पेट्रोल के हाल ही दाम-

महानगरों कि पहले बात करें तो MP के कुछ शहरों में पेट्रोल 112 रुपया प्रति लीटर से भी उपर पहुँच चुकी है। दिल्ली में 101.54 से बढ़ कर 101. 84 हो गया है। मुंबई में 107.83 रुपये, कोलकाता और चेन्नई क़ीमत बराबर है 102.49 रुपये प्रति लीटर। वहीँ बिहार में पेट्रोल की क़ीमत 104.25 रुपये लीटर दर्ज़ किया गया है।
अगर ऐसे ही पेट्रोल का दाम बढ़ता रहा तो जल्द ही आम जनता को अपने वाहनों पर ताला लगाकर साइकिल नहीं तो पैदल चलने पर मजबूर होना पड़ेगा।
बढ़ते पेट्रोल के दाम से बिहार की जनता भी काफी परेशान हैं। इसकी वजह से सब्जी ,फल,अनाज ,इत्यादि सभी घरेलू ज़रूरी सामन का दाम बढ़ गया है।