पटना हाई कोर्ट ने राज्य के विभन्न जिलों में असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली पर रोक के लिए जारी विज्ञापन के खिलाफ अर्ज़ी की सुनवाई के बाद ही अब बहाली का रास्ता साफ़ होगा। कोर्ट ने इस सन्दर्भ में राज्य सरकार को एक सप्ताह के अंदर अर्ज़ी का जवाब और वर्त्तमान समय की स्तिथि स्पस्ट करने को कहा है।
करीब 4600 पदों पर नियुक्ति के लिए 15 जुलाई से साक्षात्कार शुरू होने वाला है। कोर्ट को बताया गया कि नियुक्तियों में 50 फीसदी से अधिक पदों को आरक्षित नहीं किया जा सकता है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा जारी विज्ञापन में 70 फीसदी आरक्षित किया गया है। यह संवैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। मामले पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।
न्यायमूर्ति विकास जैन की एकल पीठ ने आमोद प्रबोधि की ओर से दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। कोर्ट न हलाकि अभी तक बहाली पर रोक नहीं लगाई है पर इस बात को साफ़ स्पस्ट किया है की कोई भी बहाली दिए गए अर्ज़ी की सुनवाई के बाद ही होगा। कोर्ट ने इस बात को स्वीकारा की दिया गया विज्ञापन संवैधानिक मैंडेट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट का स्पस्ट आदेश है की किसी भी नौकरी में 50 % से ज़ायदा आरक्षण नहीं दे सकते वहीँ असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली के लिए दिए गए विज्ञापन में 70 % आरक्षण दिया गया है। बिहार के सभी विश्वविदयलय में असिस्टेंट प्रोफेसर के खाली पदों के लिए बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने विज्ञापन जारी किया था

