. दानापुर आर्मी क्षेत्र में साइबेरियन क्रेन के पहुंचने से क्षेत्र गुलजार हो गया है. किसानों के लिए खुशहाली और मानसून का पैगाम लेकर आने वाले साइबेरियन क्रेन के आने के बाद यहां के लोगों के लिए यह पैगाम होता है कि जल्द ही मानसून आने वाला है. मानसून के सूचक के रूप में मशहूर साइबेरियन क्रेन सेना के सब एरिया क्षेत्र को मनमोहक और आकर्षक बना देता है. इनकी हिफाजत के लिए सेना भी तत्पर रहती है और अपने पार्क में सुरक्षा के इंतजाम कर देती है.
इस पक्षी को यहां किसी भी तरह से शिकार करना मना है. दरअसल 1963 में जब आर्मी का बिहार झारखंड सब एरिया का हेड क्वार्टर बना तो उस समय आर्मी ने साइबेरियन क्रेन को प्रतीक चिन्ह के रूप में भी रखा था.
साइबेरियन क्रेन भरी संख्या में यहां हर साल आते हैं. कहा जाता है कि यह साइबेरिया से आने वाले ये पक्षी यहां आकर अपना आशियाना बनाते हैं. जब यह पक्षी यहां पहुंचने लगता है तो यहां के लोग भी यह समझ जाते हैं कि इस बार मानसून काफी अच्छा होगा और जल्द ही मानसून भी आने वाला है.बताया जाता है कि साइबेरियन क्रेन को बिहार में जांघिल के नाम से जाना जाता है. यह पक्षी वर्षों से साइबेरिया से यहां पहुंचते हैं और आर्मी कैंट परिसर के पेड़ों पर अपना आशियाना बना लेते हैं. मई और जून माह में यह मानसून का सूचक बन कर आते हैं और अगस्त में अपना प्रजनन करने के बाद वापस साइबेरिया लौट जाते हैं
सेना से एक वर्ष पूर्व रिटायर हुए ब्रिगेडियर अमरेंद्र कुमार यादव का कहना है कि बिहार-उड़ीसा कैंट एरिया दानापुर 1963 में स्थापित हुआ था तब इसे सब एरिया का पहचान चिन्ह यही साइबेरियन क्रेन को बनाया गया था. यही वजह है कि इसकी सुरक्षा के लिए आर्मी के तरफ से ध्यान भी दिया जाता है.अमरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि इन पक्षियों के लिए एक कोहिनूर पार्क भी बनाया गया है जिसके चारों तरफ लगे पेड़ों पर यह साइबेरियन क्रेन आकर अपना बसेरा बनाते हैं. यह हमारे सब एरिया के लिए खुशहाली का पैगाम लेकर आता है. साइबेरियन क्रेन खुशहाली और मॉनसून लेकर आता है.

