लगभग 18.1 मिलियन जीविका दीदियों, छात्रों, ब्रह्मा कुमारी बहनों और अन्य सामाजिक समूहों को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए शामिल किया जाएगा। वे ऑडियो-विजुअल प्रचार, नुक्कड़ नाटकों और चौपालों के माध्यम से लोगों को नशीले पदार्थों की लत के प्रति जागरूक करेंगे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को एक महीने तक चलने वाले नशा-मुक्ति अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का मुख्य जोर नशीले पदार्थों के चलन को रोकने पर है, जबकि राज्य में पूर्ण शराबबंदी का एक दशक पुराना प्रयोग पहले से ही जारी है।
26 नवंबर तक चलने वाले इस जागरूकता अभियान की औपचारिक शुरुआत आबकारी एवं मद्यनिषेध विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में की गई। नशा मुक्ति के लिए एक व्हाट्सएप चैटबॉट और हेल्पलाइन भी शुरू की गई है। इसके साथ ही, राज्य के विभिन्न इलाकों में जाकर ऑडियो-विजुअल माध्यमों से नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए प्रचार वाहनों के एक बेड़े को भी रवाना किया गया है।
इस मौके पर बोलते हुए, चौधरी ने साफ तौर पर कहा कि सिर्फ शराबबंदी से काम नहीं चलेगा, क्योंकि राज्य में नशीले पदार्थों (ड्रग्स) के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि “जब्ती के आंकड़े” नशीले पदार्थों में चिंताजनक बढ़ोतरी की ओर इशारा करते हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि चरस की बरामदगी 2024 के 282 किलोग्राम से बढ़कर 2025 में 400 किलोग्राम हो गई है, हेरोइन 42 किलोग्राम से बढ़कर 65 किलोग्राम हो गई है, और पिछले साल 77 किलोग्राम अफीम बरामद की गई थी। उन्होंने आगे कहा कि नशीले पदार्थों से जुड़े मामले 20 गुना से भी ज्यादा बढ़ गए हैं, और अब तक लगभग 1,700 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
मुकदमों की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए कई ज़िलों में विशेष अदालतें बनाई गई हैं। उन्होंने पुलिस और आबकारी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को जल्द से जल्द खत्म करें और जहाँ ज़रूरत हो, वहाँ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करें।
2029 तक देश को नशा-मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य से इस अभियान को जोड़ते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में यह लक्ष्य हासिल किया जाएगा। उन्होंने अपने पूर्ववर्ती नीतीश कुमार के 2016 में शराबबंदी लागू करने के कदम की सराहना की, जो उस समय लिया गया था जब राज्य का बजट लगभग 50,000 से 55,000 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा, "नीतीश जी ने राजस्व से ज़्यादा जन-स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी है।"
अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान मुख्य रूप से सामुदायिक भागीदारी पर निर्भर है। 'जीविका दीदियों', छात्रों, ब्रह्माकुमारी बहनों और अन्य सामाजिक समूहों को इस अभियान में शामिल किया जाएगा, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इसे आगे बढ़ा सकें। शहरी इलाकों में लोगों को जागरूक करने के लिए ऑडियो-विज़ुअल माध्यमों का सहारा लिया जाएगा, जबकि ग्रामीण इलाकों में नुक्कड़ नाटक और चौपालों के ज़रिए लोगों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
चौधरी ने कहा, “जिन जिलों में नशीले पदार्थों के सेवन के मामले अधिक हैं, वहां विशेष ध्यान दिया जाएगा। हमें अपने युवाओं को बचाना होगा। नशे की लत ने पहले ही कई प्रतिभाशाली छात्रों का भविष्य बर्बाद कर दिया है।”
इसके बाद, मुख्यमंत्री ने हॉल में मौजूद अधिकारियों और नागरिकों के साथ-साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े जिलों के लोगों को शपथ दिलाई। इस शपथ में नशीले पदार्थों से दूर रहने, दूसरों को जागरूक करने और अवैध कारोबार को रोकने में मदद करने का संकल्प लिया गया। चौधरी ने विभाग, जीविका और ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी दौरा किया और वहां चल रहे प्रवर्तन तथा जागरूकता प्रयासों पर बनी एक लघु फिल्म भी दिखाई गई।
उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, आबकारी मंत्री मदन सहनी, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह 'टाइगर' और विभागीय सचिव संजय कुमार सिंह ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस मौके पर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी प्रीता वर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।