पिछले कुछ महीनों में रोहित शर्मा के भीतर आया बदलाव भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है। वजन कम करना हो, फिटनेस पर घंटे खर्च करना हो, घरेलू क्रिकेट खेलने का फैसला हो या लगातार रन बनाना, इन सबके पीछे उनका एक ही लक्ष्य दिखाई देता है। वह लक्ष्य है 2027 वनडे विश्व कप में भारत को खिताब दिलाना और अपनी ट्रॉफी कैबिनेट में उस आखिरी ICC खिताब को जोड़ना जिसकी कमी उन्हें सालों से खलती रही है। 2023 विश्व कप फाइनल में मिली हार का दर्द अभी भी उनके भीतर ताजा है और वही दर्द उन्हें और मजबूत, और समर्पित बना रहा है।
डगआउट में पलक का गिरना और दिल छू लेने वाला पल
भारत ऑस्ट्रेलिया के बीच रायपुर में खेले जा रहे दूसरे वनडे के दौरान डगआउट में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी। रोहित अपनी जगह पर खड़े थे जब पास बैठे ऋषभ पंत ने उनकी आंख के पास एक ढीली पड़ी पलक देखी। पंत ने बेहद सावधानी से वह पलक रोहित की आंखों से हटाई और उन्हें हाथ में देकर कहा कि वे कोई इच्छा मांगें। हर भारतीय ने अपने बचपन में यह रस्म निभाई है जहां पलक पर की गई इच्छा पूरी होने की उम्मीद की जाती है। रोहित भी इस परंपरा पर यकीन रखते हैं और उन्होंने तुरंत आंखें बंद कर अपनी मन की सबसे बड़ी इच्छा मांगी।
अभिषेक नायर ने रोहित की ख्वाहिश को समझा
रोहित के बेहद करीबी दोस्त और क्रिकेटर से कमेंटेटर बने अभिषेक नायर का मानना है कि रोहित की इच्छा दो में से एक ही हो सकती थी। पलक देखते ही मन में आया पहला ख्याल विश्व कप 2027 की ट्रॉफी को अपने हाथों में उठाने का रहा होगा। नायर ने कहा कि उनका दूसरा सपना अगले मैच में शतक जमाने का है क्योंकि रोहित जब भी किसी लक्ष्य पर फोकस करते हैं, तो उसे हासिल करने के लिए पूरा दम लगा देते हैं। यह सपना केवल करियर का लक्ष्य नहीं बल्कि उनके जीवन की सबसे बड़ी अधूरी कहानी है जिसे वे हर हाल में पूरा करना चाहते हैं।
ऑस्ट्रेलिया वनडे श्रृंखला के बाद से रोहित जिस अंदाज़ में खेल रहे हैं, उससे यह साफ जाहिर होता है कि उनकी मेहनत का असर मैदान पर पैर जमाकर दिखने लगा है। उनकी हालिया पारियों में 73, नाबाद 121 और 57 रन शामिल हैं जो इस बात का सबूत हैं कि वह फिर से अपनी चरम फॉर्म में लौट रहे हैं। उनकी फिटनेस लेवल में आए निखार और नेट्स में किए जा रहे लंबे अभ्यास सत्रों ने भी उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है। यह वही रोहित हैं जो कभी बड़े शॉट्स के लिए जाने जाते थे, लेकिन अब वह धैर्य, जिम्मेदारी और परिपक्वता के साथ टीम को आगे ले जाने वाले कप्तान बन चुके हैं।
घरेलू क्रिकेट में खेलने का निर्णय रोहित की गंभीरता दिखाता है
रोहित शर्मा के मुंबई की ओर से विजय हजारे ट्रॉफी खेलने की संभावना ने क्रिकेट जगत को चौंकाने के साथ उत्साहित भी किया है। यह निर्णय बताता है कि रोहित सिर्फ बड़े मंच पर ही नहीं, बल्कि हर स्तर पर खुद को तराशने के लिए तैयार हैं। 2027 विश्व कप तक भारत केवल कुछ ही वनडे खेलेगा और जनवरी के बाद तो लंबा ब्रेक रहेगा। ऐसे में घरेलू क्रिकेट में खेलना उनके लिए लय बनाए रखने का सबसे बड़ा साधन होगा। इंग्लैंड दौरे से पहले यह तैयारी उन्हें उसी आत्मविश्वास के साथ ले जाएगी जिसकी जरूरत किसी भी विश्व कप दावेदार को होती है।
