बुधवार की शाम सीएम हाउस में माहौल बेहद गंभीर और उत्साह से भरा हुआ था। जदयू के विधायकों की भीड़ उस क्षण का इंतजार कर रही थी जब नेतृत्व को लेकर अंतिम निर्णय सामने आएगा। जैसे ही बैठक शुरू हुई, यह लगभग साफ था कि नीतीश कुमार ही पार्टी की पसंद हैं। लेकिन फिर भी औपचारिक घोषणा का महत्व अलग होता है जब जदयू विधायकों ने एकआवाज़ में नीतीश को फिर से अपना नेता चुना, उस पल ने पार्टी के भीतर एकता और भरोसे की मजबूत तस्वीर पेश कर दी। नीतीश के चेहरे पर भी यह साफ दिख रहा था कि यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक अधिग्रहण नहीं बल्कि जनता और पार्टी की अपेक्षाओं का सम्मान है। बिहार में स्थिरता की उम्मीद एक बार फिर उन्हीं पर टिकती नजर आ रही है।
भाजपा की बैठक पर सबकी निगाहें, NDA की नई सरकार की रफ़्तार और दिशा तय होगी
जदयू की घोषणा के बाद राजनीतिक हलचल भाजपा खेमे में भी तेज हो गई है। भाजपा अपने विधायक दल की बैठक आज करेगी, जिसमें नेता चुना जाएगा। यह सिर्फ एक नाम तय करने का मामला नहीं बल्कि आने वाले वर्षों में बिहार की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इसके संकेत भी इसी मीटिंग से निकलेंगे। शाम 3:30 बजे विधानसभा के सेंट्रल हॉल में होने वाली NDA की बैठक को लेकर माहौल बेहद गंभीर और रणनीतिक है। इसमें शामिल होने वाले 202 विधायकों को यह एहसास है कि वे सिर्फ एक सरकार नहीं बल्कि एक बड़े राजनीतिक गठबंधन की नई शुरुआत के गवाह बनने जा रहे हैं। विधानसभा के गलियारों में चर्चा तेज है और सबकी नज़र इस ऐतिहासिक औपचारिकता पर टिकी है।
इस्तीफे से शपथ तक, नीतीश का राजनीतिक सफर आज और मजबूत होगा
विधायक दल का नेता चुने जाने के तुरंत बाद नीतीश कुमार एक और संवैधानिक कदम उठाएंगे वे राज्यपाल से मिलकर मौजूदा सरकार से इस्तीफा देंगे। यह कदम भले ही औपचारिक हो, लेकिन इसका महत्व गहरा है। इसी इस्तीफे के दूसरे ही क्षण वे नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इन प्रक्रियाओं के बीच नीतीश कई तरह की राजनीतिक संतुलन साधते हैं—गठबंधन की मर्यादा भी, प्रशासनिक तेजी भी और जनता के भरोसे की कसौटी भी। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह संक्रमण नीतीश के अनुभव को दर्शाता है, जो दशकों की राजनीति में उन्हें एक स्थिर नेता के रूप में स्थापित करता है। शाम तक पूरा पटना एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी से भर उठेगा।
मंगलवार को मौसम बदला हुआ था, लेकिन उससे भी ज़्यादा बदलती लग रही थी गांधी मैदान की तस्वीर। हर तरफ पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी, मंच तैयार करने वाले कर्मचारी एक बड़े आयोजन की तैयारी में जुटे थे। नीतीश खुद वहां पहुंचे और हर कोने का बारीकी से निरीक्षण किया। मंच की ऊंचाई, बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा घेरा, VIP गेट, मीडिया प्लेटफॉर्म सब कुछ उन्होंने ध्यान से देखा। उनकी मौजूदगी ने अधिकारियों में और तेजी भर दी। गांधी मैदान इन दिनों एक राजनीतिक उत्सव स्थल की तरह दिख रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे पूरा शहर इस बड़े पल का स्वागत करने को तैयार हो रहा हो।
20 नवंबर का बड़ा दिन, देशभर के बड़े नेता बिहार के राजनीतिक मंच पर जुटेंगे
शपथ ग्रहण समारोह के लिए इस बार राजनीतिक उपस्थिति अभूतपूर्व होने जा रही है। मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी इसे राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम बना देगी। उनके साथ गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहेंगे। इसके अलावा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, एमपी के सीएम मोहन यादव, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, राजस्थान से भजन लाल शर्मा, महाराष्ट्र से देवेंद्र फडणवीस सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री शिरकत करेंगे। सिर्फ राजनीतिक हस्तियां ही नहीं पद्मश्री, पद्मभूषण सम्मानित लोग, वैज्ञानिक, साहित्यकार, कलाकार और बिहार के विविध क्षेत्रों से नामचीन लोग भी आमंत्रित हैं।
यह समारोह सिर्फ शपथ नहीं, बल्कि बिहार के राजनीतिक इतिहास का एक अहम अध्याय बनने वाला है।
