विवाद की जड़: विदेशी कर्मचारियों पर उपराष्ट्रपति का तीखा हमला

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने विदेशी कर्मचारियों को “सस्ता श्रमिक” करार दिया और कहा कि अमेरिका को इनकी जरूरत नहीं है। उन्होंने विपक्षी डेमोक्रेट्स पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका मॉडल कम वेतन वाले प्रवासियों को देश में लाकर अमेरिकी नागरिकों के रोजगार और वेतन पर असर डालता है। वेंस का कहना है कि अमेरिका को सस्ते विदेशी श्रम पर निर्भर नहीं होना चाहिए, बल्कि अमेरिकी मजदूरों को तकनीकी तौर पर मजबूत करना चाहिए।

H-1B वीजा खत्म करने की तैयारी: रिपब्लिकन का नया कदम

ट्रम्प की पार्टी रिपब्लिकन H-1B वीजा को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव ला रही है। पार्टी की सदस्य मार्जोरी टेलर ग्रीन ने कहा कि H-1B वीजा का गलत इस्तेमाल हो रहा है। उनका कहना है कि “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत इस वीजा को खत्म कर दिया जाएगा, लेकिन अगले 10 सालों में हर साल 10,000 डॉक्टरों के लिए H-1B जारी होंगे। यह कदम खास तौर पर भारतीय प्रवासियों की एंट्री पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि अभी हर साल 85,000 H-1B में लगभग 70% भारतीय ही आते हैं। हालांकि, ट्रम्प ने पहले कहा था कि अमेरिका में कुछ विशेष क्षेत्रों में कुशल प्रतिभाओं की कमी है। उन्होंने जॉर्जिया की एक बैटरी फैक्ट्री का उदाहरण देते हुए बताया कि दक्षिण कोरियाई कंपनी ने 500-600 विशेषज्ञ भेजे ताकि अमेरिकी कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा सके। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि कुछ नौकरियों के लिए विदेशी स्किल्ड वर्कर्स की आवश्यकता है क्योंकि बेरोजगार अमेरिकी कर्मचारियों को खतरनाक और विशेषज्ञता मांगने वाले कामों पर नहीं लगाया जा सकता।

वीजा फीस में 100 गुना बढ़ोतरी

ट्रम्प प्रशासन ने H-1B वीजा की एप्लिकेशन फीस को 1,000 डॉलर से बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर कर दिया। यह कदम विदेशी कर्मचारियों की संख्या को कम करने के प्रयास का हिस्सा है। ट्रम्प ने कहा कि वीजा संख्या कम करनी होगी, लेकिन टैलेंटेड लोगों को विदेश से लाना भी जरूरी है। विदेशी छात्रों के मामले में ट्रम्प ने यू-टर्न लिया है। उन्होंने कहा कि विदेशी छात्रों को अमेरिका में पढ़ाई की अनुमति मिलती रहनी चाहिए। उनका कहना है कि ये छात्र विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति और शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं। अगर चीन और अन्य देशों से आने वाले छात्रों की संख्या घटाई गई, तो अमेरिका के करीब आधे कॉलेज बंद हो सकते हैं। इस साल मई में ट्रम्प प्रशासन ने विदेशी छात्रों के नए वीजा इंटरव्यू पर रोक लगा दी थी। इसका मकसद देश की यूनिवर्सिटी में “वामपंथी और अन्य विचारों” की जांच करना बताया गया। बाद में इंटरव्यू शुरू हुए, लेकिन सोशल मीडिया जांच और सुरक्षा नियम और कड़े कर दिए गए। इसके चलते अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 70% गिरावट आई है। कई छात्र अब अन्य देशों में पढ़ाई के विकल्प तलाश रहे हैं।

H-1B वीजा और विदेशी कर्मचारियों पर विवाद दिखाता है कि अमेरिका प्रतिभा की कमी और रोजगार सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ ट्रम्प प्रशासन विदेशी कर्मचारियों की संख्या घटाना चाहता है, वहीं विशेषज्ञ और छात्रों की जरूरत को भी नकार नहीं सकता। भारतीयों और अन्य विदेशी छात्रों के लिए अमेरिका अब चुनौतीपूर्ण स्थल बनता जा रहा है।