श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में रात 11:22 बजे हुआ धमाका इतना तेज था कि पूरा इलाका हिल उठा। जिस कमरे में फॉरेंसिक टीम अमोनियम नाइट्रेट का सैंपल ले रही थी, वहां अचानक आग की लपटें उठीं और कुछ ही सेकेंड में पूरा कमरा ध्वस्त हो गया। धमाके से थाने के अंदर मौजूद पुलिसकर्मी, फॉरेंसिक एक्सपर्ट, क्राइम ब्रांच फोटोग्राफर और राजस्व अधिकारी इसकी चपेट में आ गए। नौ लोग मौके पर ही या अस्पताल पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ चुके थे। 32 घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। पास खड़ी लगभग 10 गाड़ियां पूरी तरह जल गईं, घरों की खिड़कियां टूट गईं और आस-पास के लोगों ने बताया कि ऐसा धमाका उन्होंने जीवन में पहली बार सुना था।
फरीदाबाद से जब्त विस्फोटक, राजनीतिक प्रतिक्रिया और दबाव
यह विस्फोटक दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट में गिरफ्तार किए गए डॉ. मुजम्मिल गनई के फरीदाबाद स्थित किराए के घर से बरामद हुआ था। वहां से 360 किलो तक के घातक पदार्थ जब्त किए गए थे और पुलिस यह जांच रही थी कि यह विस्फोटक कैसे तैयार हुआ, किसके संपर्क में था और इसकी आपूर्ति मातृ मॉड्यूल तक कैसे पहुंची। सैंपलिंग इसी जांच का हिस्सा थी, लेकिन SOP में किस स्तर पर चूक हुई, यह अब बड़ा सवाल बन गया है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि इतने बड़े अमोनियम नाइट्रेट स्टॉक को थाने जैसे संरचना में सैंपल करना जोखिम भरा था। यह ब्लास्ट सीधे तौर पर दिल्ली हमले की कड़ियों को और उलझाकर गया है, क्योंकि जितना गहरा यह मॉड्यूल साबित हो रहा है, उतना ही बड़ा खतरा भी।
धमाके के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। फारूक अब्दुल्ला ने खुलकर कहा कि यह “हमारी गलती” थी और विस्फोटक विशेषज्ञों से सलाह न लेना बेहद लापरवाही थी। उनके बयान ने घाटी की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि पहले ही दिल्ली ब्लास्ट के बाद कश्मीरियों पर लगातार सवाल उठ रहे थे। वहीं केंद्र सरकार ने कहा है कि यह एक “हादसा” प्रतीत होता है, लेकिन विस्तृत जांच होगी। CPI(M) और स्थानीय दल भी इस घटना को गंभीर संस्थागत चूक कहकर पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। घाटी का राजनीतिक माहौल तना हुआ है, खासकर ऐसे समय में जब जम्मू-कश्मीर में चुनावी चर्चा तेज है।
संवेदनशील सीटों पर असर, जांच के कठोर सवाल
इस धमाके का तत्काल प्रभाव श्रीनगर की कई विधानसभा सीटों पर महसूस किया जा रहा है। हज़रतबल, खानयार, ईदगाह और अमीरा कदल जैसे क्षेत्रों में लोग पहले ही दिल्ली ब्लास्ट के बाद असुरक्षा महसूस कर रहे थे, अब नौगाम की यह घटना बड़ी चिंता बन गई है। दिल्ली में चांदनी चौक, बल्लीमारान और मतिया महल जैसी सीटों पर भी सुरक्षा मुद्दा चुनावी विमर्श में भारी पड़ने लगा है। दो बड़े ब्लास्ट, एक राजधानी में और एक कश्मीर में सीधे-सीधे उन इलाकों की राजनीति को प्रभावित करते हैं जहां सुरक्षा, पहचान और विश्वास सबसे नाज़ुक मुद्दे हैं। आने वाले महीनों में इन सीटों पर वोटरों का व्यवहार सुरक्षा और राज्य की क्षमता पर कठोर रूप से प्रभावित होता दिख सकता है।
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फॉरेंसिक टीम SOP के तहत काम कर रही थी, लेकिन फिर भी ऐसा हादसा हो गया, यह बताता है कि विस्फोटक कितना संवेदनशील था या फिर सुरक्षा में कितनी कमी रह गई। जांच एजेंसियां अब दोहरी चुनौती में हैं—एक, मॉड्यूल की जड़ों तक पहुंचना और दूसरी, लोगों का विश्वास वापस लाना।
