NDA की प्रचंड लहर: शुरुआती बढ़त से भारी बहुमत तक
गिनती शुरू होते ही NDA ने अपनी बढ़त दर्ज करानी शुरू कर दी। सुबह 8 बजे शुरू हुए काउंटिंग के शुरुआती राउंड में पोस्टल बैलेट ने ही NDA के पक्ष में माहौल बना दिया। कुछ ही घंटों में यह रुझान एकतरफा हो गया और बीजेपी–जेडीयू गठबंधन ने 243 सीटों वाली विधानसभा में 200 के पार पहुंचकर इतिहास रच दिया। यह जीत केवल बड़ी नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो रही है।
बीजेपी बनी NDA की सबसे बड़ी ताकत, जेडीयू पीछे लेकिन मजबूत
बीजेपी ने इस चुनाव में 80 सीटें जीतकर गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी पहचान पुख्ता की, जबकि जेडीयू 67 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। दोनों मिलकर ही NDA को 147 स्पष्ट जीत दिला चुके थे, जब तक कुल 205 सीटों का परिणाम घोषित हुआ। सीट बंटवारे में बराबरी का दावा करने वाली बीजेपी अब वास्तविक रूप में गठबंधन में प्रमुख शक्ति बनकर उभरी है।
महागठबंधन का पतन: आरजेडी और कांग्रेस को भारी झटका
महागठबंधन के लिए यह चुनाव किसी राजनीतिक आपदा से कम नहीं रहा। पिछली बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने वाली आरजेडी इस बार केवल 20 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस महज 6 सीटों के साथ फिर कमजोर कड़ी साबित हुई। लेफ्ट दलों को 1–2 सीटों पर बढ़त मिली, लेकिन यह प्रदर्शन विपक्ष के लिए कोई राहत नहीं ला सका। महागठबंधन का पूरा ढांचा इस चुनावी सुनामी में बिखर गया।
प्रशांत किशोर की चुनौती धरी रह गई, जन सुराज ‘फर्श पर’
कई महीनों की पदयात्रा, हजारों की भीड़ और बड़े दावों के बावजूद प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त होना तय है। किशोर ने जेडीयू के 25 से ज्यादा सीटें न जीतने का दावा किया था, जबकि पार्टी 80 पार करते हुए 2010 के बाद का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज करा रही है।
चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) ने 17 सीटें जीतकर और 2 पर आगे रहकर कुल 19 की बड़ी छलांग लगाई। यह प्रदर्शन उन्हें नई राजनीतिक ताकत और सौदेबाजी की क्षमता देता है। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, रालोसपा और AIMIM सहित छोटे दल भी कई सीटों पर प्रभावी रहे, जिसने मुकाबले को कई जगह त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय बनाया।
राघोपुर का रोमांच: तेजस्वी यादव ने कड़ी टक्कर में सीट बचाई
पूरे बिहार में महागठबंधन के बिखराव के बीच एकमात्र बड़ी राहत तेजस्वी यादव की राघोपुर में जीत रही। अंतिम 32वें राउंड तक चले कड़े मुकाबले में उन्होंने बीजेपी के सतीश कुमार को 14,532 वोटों से हराया। दूसरी ओर, उनके भाई तेज प्रताप, जिन्होंने अलग पार्टी बनाई थी, महुआ से चुनाव हार गए और उन्होंने परिणाम को स्वीकार किया। नतीजों से साफ है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेडीयू की वापसी दमदार रही, और यह उनका संभावित पाँचवाँ कार्यकाल हो सकता है। लेकिन बीजेपी की भारी बढ़त ने मुख्यमंत्री पद को लेकर नई राजनीति को जन्म दे दिया है। क्या नीतीश फिर शपथ लेंगे, या बीजेपी अपना नेता आगे करेगी, इस पर अगले दिनों में स्थिति साफ होगी।
चुनाव परिणामों ने दिखाया कि इस बार महिला वोटरों और युवा मतदाताओं ने NDA को निर्णायक बढ़त दिलाई। नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की संयुक्त अपील ने राज्य में एक मजबूत “नीमो” वेव बनाई। सामाजिक कल्याण की योजनाएं, महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार की उम्मीदें, इन सबने मिलकर NDA को विशाल समर्थन दिया।
