इस्लामाबाद और खैबर पख्तूनख्वा में मंगलवार को हुए बम धमाकों के बाद पाकिस्तान एक बार फिर सैन्य कार्रवाई के मोड में दिख रहा है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट चेतावनी दी “खुदा ने चाहा तो हम जवाब जरूर देंगे। अफगानिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर हमला करना अब नकारा नहीं जा सकता।” Geo News को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के धैर्य की सीमा अब खत्म हो रही है। देश के भीतर एक के बाद एक हो रहे हमलों के बाद, इस्लामाबाद सरकार अब निर्णायक कार्रवाई के दबाव में है।
इस्लामाबाद में खून से सनी सुबह, आत्मघाती हमले में 12 की मौत, 36 घायल
मंगलवार की सुबह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक भयावह धमाके से दहल उठी। एक आत्मघाती हमलावर ने सुरक्षा चौकी के पास खुद को उड़ा लिया, जिससे 12 लोगों की मौत हो गई और 36 से ज्यादा घायल हो गए। यह धमाका ऐसे समय हुआ जब पाकिस्तान पहले ही आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते आतंकी खतरे से जूझ रहा है। हमले के तुरंत बाद सेना ने इलाके को घेर लिया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, विस्फोट में इस्तेमाल किया गया बारूद मिलिट्री ग्रेड का था, जिससे यह साफ है कि हमलावरों को बाहरी समर्थन मिला था।
PM शहबाज का आरोप भारत पर, रक्षामंत्री ने कहा अफगानिस्तान जिम्मेदार
धमाके के बाद पाकिस्तान सरकार में विरोधाभासी बयानबाजी शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस हमले का ठीकरा भारत पर फोड़ा, कहा “यह हमारे विकास और स्थिरता के खिलाफ साजिश है।” लेकिन रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने साफ कहा कि यह हमला अफगानिस्तान की जमीन से संचालित आतंकी नेटवर्क ने करवाया है। उनके मुताबिक, अफगान सरकार न तो इन आतंकियों पर नियंत्रण रख पा रही है, न ही पाकिस्तान के प्रति अपने वादों पर कायम है। इस बयान ने पाकिस्तान-अफगान रिश्तों में एक बार फिर तनाव की दीवार खड़ी कर दी है।
“एक साल में 3,000 आतंकी पाकिस्तान में घुसे” — ख्वाजा आसिफ का दावा
आसिफ ने कहा कि “पिछले एक साल में अफगानिस्तान से करीब 2500 से 3000 आतंकी पाकिस्तान में दाखिल हुए हैं।” उन्होंने बताया कि इन आतंकियों ने अब देश के अलग-अलग इलाकों में स्थानीय नेटवर्क से मिलकर ठिकाने बना लिए हैं। मारे गए आतंकियों में 55% अफगानी मूल के हैं। रक्षामंत्री ने तीखे लहजे में कहा “हमने अफगानिस्तान पर भरोसा किया, लेकिन अब वहां की सरकार पर उनके अपने नागरिक भी भरोसा नहीं करते। आश्वासन से अब सुरक्षा नहीं मिल सकती।” यह बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि आने वाले संभावित सीमा पार हमलों का संकेत भी माना जा रहा है।
आर्मी ने पहले ही नाकाम की थी एक बड़ी साजिश, वाना में कॉलेज पर हमला टला
इस्लामाबाद विस्फोट से एक दिन पहले ही खैबर पख्तूनख्वा के वाना शहर में पाकिस्तानी सेना ने एक बड़ा आतंकी हमला नाकाम किया था। एजेंसी एपी के मुताबिक, 6 पाकिस्तानी तालिबान लड़ाके एक आर्मी कॉलेज को निशाना बनाने की साजिश में थे। सेना की कार्रवाई में दो आतंकी मारे गए, जबकि तीन आतंकी कॉलेज कैंपस में घुसने के बाद एक इमारत में घिर गए। करीब 16 नागरिक और कुछ सैनिक घायल हुए और कॉलेज के पास कई घरों को नुकसान पहुंचा। यह इलाका लंबे समय से पाकिस्तानी तालिबान, अल-कायदा और अन्य चरमपंथी संगठनों का गढ़ माना जाता है। सेना का कहना है कि अगर यह साजिश कामयाब होती, तो यह देश के शैक्षणिक ढांचे और सेना दोनों पर सीधा हमला होता।
पाकिस्तान के भीतर सियासी हलचल जब आरोपों का निशाना खुद सरकार बनी
धमाकों के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ गई है। प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के बयानों के बीच मतभेद ने सरकार की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी पार्टियां अब सरकार पर सुरक्षा नाकामी का आरोप लगा रही हैं। कई विश्लेषक मानते हैं कि अफगानिस्तान को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी रणनीति है “आंतरिक विफलता को बाहरी दुश्मन से ढकने की कोशिश।” लेकिन इस बार हालात इतने गंभीर हैं कि पाकिस्तान के भीतर भी “सुरक्षा पुनर्विचार” की मांग उठने लगी है।
