आस्था और आत्मविश्वास का मेल, महावीर मंदिर पहुंचे नीतीश कुमार
पटना की सुबह बुधवार को राजनीति से ज्यादा धार्मिक माहौल में बदली, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक महावीर मंदिर पहुंच गए। चुनाव के नतीजों से पहले उनकी यह यात्रा केवल पूजा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी मानी जा रही है। माथे पर तिलक और हाथों में प्रसाद लिए नीतीश ने हनुमान जी के दरबार में प्रार्थना की कि “बिहार में शांति और स्थिरता बनी रहे।” राजनीतिक हलकों में इसे शांति से पहले तूफ़ान की तरह देखा जा रहा है। नीतीश की यह आस्था भरी यात्रा नतीजों से पहले उनके आत्मविश्वास को दर्शाती है। विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार इस बार किंगमेकर नहीं, बल्कि खुद को ‘किंग’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश में हैं।
501 किलो लड्डू और जश्न की तैयारी — बीजेपी ने पहले ही मना लिया विजय उत्सव
पटना में इन दिनों सिर्फ राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि घी, बेसन और चीनी की खुशबू भी तैर रही है। वजह — बीजेपी कार्यकर्ताओं ने चुनाव परिणाम से पहले ही जश्न की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी के कार्यकर्ता 501 किलो लड्डू तैयार कर रहे हैं। बीजेपी नेता कल्लू ने कहा, “NDA की जीत तय है, यह जनता का जनादेश है।” कार्यालयों में रंगोली बनाई जा रही है, बैनर लगाए जा रहे हैं, और ढोलक की थाप पर कार्यकर्ता “डबल इंजन सरकार फिर से” के नारे लगा रहे हैं। विपक्षी दल इस आत्मविश्वास को जल्दबाजी का जश्न बता रहे हैं। लेकिन बीजेपी का मानना है कि ये लड्डू सिर्फ जीत के लिए नहीं, बल्कि जनता के आशीर्वाद का प्रतीक हैं।
मांझी का ‘सिक्सर’ बयान, राजनीतिक निशाने पर जंगलराज और भ्रष्टाचार
वोटिंग के अगले ही दिन केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट किया जिसने सियासत में नई बहस छेड़ दी। उन्होंने लिखा, “सिक्सर में छह गोली होती हैं और हमारे छह उम्मीदवार उसी कारतूस की तरह हैं, जो बिहार में जंगलराज की वापसी नहीं होने देंगे।” मांझी ने यह भी लिखा कि पहली गोली जंगलराज पर, दूसरी भय और पक्षपात पर, तीसरी भ्रष्टाचार पर, चौथी दलित अत्याचारियों पर, पांचवीं अपराध पर और छठी नफरत और अंधेरे पर चलेगी। उनका यह पोस्ट एक तरफ चुनावी जोश का प्रतीक बना, तो दूसरी ओर विपक्ष ने इसे अहंकार और अतिविश्वास की संज्ञा दी। लेकिन इतना तय है कि मांझी ने अपने अंदाज में “सुशासन बनाम जंगलराज” की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।
RJD का पलटवार — ‘एग्जिट नहीं, एग्जैक्ट पोल पर भरोसा’
RJD ने एग्जिट पोल्स को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि “हमें किसी टीवी चैनल या एजेंसी के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि जनता के वोट पर भरोसा है।” पार्टी ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा “एग्जिट नहीं, एग्जैक्ट पोल पर भरोसा कीजिए।” पार्टी का कहना है कि सत्ता पक्ष प्रशासनिक मशीनरी के सहारे धांधली की कोशिश में है। इसलिए सभी पोलिंग एजेंट्स को सतर्क रहने और ईवीएम की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। RJD ने अपने एजेंटों से कहा है कि मतदान समाप्त होने के बाद फॉर्म 17-C की कॉपी अवश्य लें, ईवीएम सीलिंग के दौरान मौजूद रहें और वज्रगृह (स्ट्रॉन्ग रूम) तक ईवीएम के साथ जाएं। यह बयान पार्टी के “पोस्ट-वोट स्ट्रैटेजी” का हिस्सा है, जिसके तहत RJD चाहती है कि कोई भी संभावित गड़बड़ी पकड़ी जा सके।
पप्पू यादव का दावा, “महागठबंधन की सरकार आ रही है”
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने दावा किया है कि इस बार बिहार की जनता ने बदलाव के पक्ष में वोट दिया है। उन्होंने कहा, “एग्जिट पोल कब सही साबित हुए हैं? बिहार ने इस बार महागठबंधन को वोट दिया है। जनता बदलाव चाहती है, और यह वोटिंग पैटर्न साफ़ तौर पर वही बता रहा है।” पप्पू यादव ने यह भी कहा कि एनडीए और बीजेपी का “जीत का आत्मविश्वास” जनता की नब्ज़ नहीं पढ़ पा रहा है। उन्होंने जोड़ा, “बिहार में हवा बदली है, इस बार नतीजे सबको चौंकाएंगे।” उनका यह बयान विपक्षी खेमे के लिए उत्साहवर्धक साबित हुआ है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे “हार के डर में दिया गया बयान” बताया है।
सियासत का उफान, जब सबको अपनी जीत का यकीन है
चुनाव के नतीजों से पहले बिहार का माहौल किसी रणभूमि जैसा हो गया है। हर दल अपने-अपने तरीकों से जीत के गीत गा रहा है। एक ओर नीतीश मंदिर में पूजा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी लड्डू बना रही है। RJD सोशल मीडिया पर सतर्कता की अपील कर रही है जबकि पप्पू यादव बदलाव की बात कर रहे हैं। 14 नवंबर को सुबह 8 बजे से काउंटिंग शुरू होगी और उसी दिन तय होगा कि बिहार ने ‘डबल इंजन पर भरोसा जताया या बदलाव का रास्ता चुना।’ फिलहाल पूरा राज्य एक प्रतीक्षा में है जहां विश्वास, डर, उम्मीद और सस्पेंस सब एक साथ घुल गए हैं।
