दरभंगा की धरती पर गूंजा ‘गोला बनाम गोली’ का नारा

दरभंगा में चुनाव प्रचार के अंतिम दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भाषण जोश, आक्रोश और राष्ट्रवाद से भरा रहा। भीड़ से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा, “6 नवंबर को कमल छाप पर बटन दबाना केवल विधायक को जीताने के लिए नहीं, बल्कि जंगलराज को लौटने से रोकने के लिए है।”
शाह ने अपने भाषण में पाकिस्तान को लेकर भी सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि “पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 20 दिन के भीतर पाकिस्तान में घुसकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। अगर पाकिस्तान फिर से हिम्मत करेगा, तो गोली का जवाब गोले से दिया जाएगा और वो गोले बिहार के डिफेंस कॉरिडोर में बनेंगे।”

डिफेंस कॉरिडोर’ में बिहार की भूमिका का ऐलान

शाह ने पहली बार स्पष्ट रूप से कहा कि बिहार में डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना की जाएगी, जिससे राज्य न केवल औद्योगिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी मजबूत बनेगा। उन्होंने कहा, “अब पाकिस्तान को सबक सिखाने वाले तोप के गोले बिहार की मिट्टी में बनेंगे।”
यह बयान बिहार की औद्योगिक छवि को बदलने के इरादे का संकेत है, जो राज्य को राष्ट्रीय सुरक्षा उत्पादन का केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।

‘वंशवाद बनाम विकास’ की जंग

शाह ने लालू परिवार और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “लालू-राबड़ी अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, और सोनिया गांधी अपने बेटे को प्रधानमंत्री। लेकिन न सीएम की कुर्सी खाली है, न पीएम की। बिहार में नीतीश कुमार हैं, और दिल्ली में नरेंद्र मोदी।”
उनके इस बयान से स्पष्ट था कि बीजेपी महागठबंधन पर “वंशवादी राजनीति” का ठप्पा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

‘दरभंगा की धरती से मोदी का अपमान’ – शाह का भावनात्मक हमला

शाह ने राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को निशाने पर लेते हुए कहा, “यह यात्रा घुसपैठियों को बचाने के लिए थी। दरभंगा की धरती पर राहुल गांधी की सभा में प्रधानमंत्री मोदी और उनकी मां के लिए अपशब्द कहे गए। जब-जब मोदी को गाली दी जाती है, तब-तब कमल और ज्यादा खिलता है।”
यह बयान न केवल भावनात्मक था, बल्कि मतदाताओं के राष्ट्रवादी और धार्मिक जुड़ाव को भी जागृत करने की कोशिश थी।

‘जंगलराज’ की वापसी का खतरा

अमित शाह ने अपने भाषण में चेतावनी दी कि “जंगलराज अब चेहरा और वेश बदलकर लौटना चाहता है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस बार ऐसे तत्वों को सत्ता में लौटने से रोकें।
उन्होंने तीखा सवाल उठाया कि “लालू और राहुल की सरकारों ने 25 साल तक बिहार और केंद्र में सत्ता चलाई, लेकिन दरभंगा के लिए क्या किया? सिर्फ लूट और भ्रष्टाचार।”

‘राम मंदिर से सीता मंदिर तक’ – भावनात्मक राजनीति की नई डोर

शाह ने राम मंदिर मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा, “RJD और कांग्रेस ने हमेशा राम मंदिर का विरोध किया। लेकिन मोदी जी ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनवाया और अब हम सीता जी का भव्य मंदिर सीतामढ़ी में बना रहे हैं। अयोध्या और सीतामढ़ी को जोड़ने वाली ट्रेन जल्द शुरू होगी।”
यह बयान धार्मिक भावना और क्षेत्रीय गौरव को एक साथ जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

‘मिथिला हाट’ में शाह का लोकसंवाद: राजनीति के साथ परंपरा का स्वाद

मधुबनी की जनसभा के बाद शाह ने स्थानीय नेताओं के साथ ‘मिथिला हाट’ में पारंपरिक बिहारी भोजन का स्वाद लिया। पीतल की थाली में परोसे गए 36 व्यंजनों की ‘सचार थाली’ में मालपुआ, ठेकुआ, दाल-बाटी-चोखा और माखन भोग जैसे पारंपरिक पकवान शामिल थे।
राजनीतिक चर्चा और भोजन के बीच शाह ने स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान का संदेश देने की कोशिश की। इस मुलाकात को “जनता से जुड़ाव और जमीन से जुड़ी राजनीति” का प्रतीक माना जा रहा है।

दरभंगा से निकला चुनावी शंखनाद

अमित शाह का यह भाषण सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक वैचारिक घोषणा की तरह था—जहां राष्ट्रवाद, सुरक्षा, संस्कृति और विकास एक साथ गूंथे गए।
उन्होंने जहां बिहार के औद्योगिक भविष्य की झलक दिखाई, वहीं विपक्ष पर हमला बोलते हुए मतदाताओं की भावनाओं को सीधे छुआ।
दरभंगा से उठी यह आवाज़ अब पूरे बिहार में गूंजने लगी है—“गोली का जवाब गोले से, और जंगलराज का जवाब वोट से।”