बिहार क्रिकेट का हाल कभी नहीं बदलेगा क्योंकि जिन्हें बोलना चाहिए वो चुप हैं और जो बोलते हैं उन्हें हमेशा के लिए चुप करा दिया जाता है। बिहार के खिलाड़ियों को बंगाल और झारखंड से खेलना पड़ता है क्योंकि बिहार से अगर क्रिकेटर बनना है, तो उसके लिए एक जन्म तो कम पड़ जाएगा।

यहाँ हर जिले में अक्सर दो लीग्स होती हैं, चयन के आखिरी पड़ाव तक खिलाड़ी इस दुविधा में ही रहते हैं कि कौन सी लीग में खेले हुए खिलाड़ियों का चयन होगा। यह बात सबको पता है कि बिहार के क्रिकेट में कितनी पॉलिटिक्स है लेकिन फिर भी कोई खुलकर इस पर बात नहीं करता है क्योंकि अगर आपने खुलकर बात कर दी और आपत्ति उठा दी तो आपका करियर उसी वक्त खत्म हो जाएगा। आपके चयन में हर बार कोई न कोई आपत्ति डाल दी जाएगी और आपकी जिंदगी पल भर में बर्बाद हो जाएगी।

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