डीजीपी एसके सिंघल ने अपराध पर लगाम लगाने के लिए मुख्यालय में तैनात पुलिस अफसरों के साथ जिलों के एसपी को कई बिंदुओं पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। अपराधियों की गिरफ्तारी, त्वरित अनुसंधान और स्पीडी ट्रायल पर फोकस करने को कहा है। डीजीपी ने इसके अलावा आदतन अपराधियों की जमानत रद्द (बेल कैंसिलेशन) कराने की मुहिम को जोरशोर से चलाने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि पुलिस जमानत रद्द कराने की अपनी कोशिशों में कामयाब हुई तो इससे अपराध की घटनाओं पर लगाम लगेगा।
जमानत मिलने के बाद दोबारा अपराध में शामिल होने के साक्ष्य मिलते हैं तो पूर्व के मामले में मिली जमानत रद्द कराई जा सकती है। कानून में ऐसा प्रावधान हैं। इसके लिए पुलिस की ओर से जमानत रद्द करने के लिए अदालत से अपील की जाएगी। यदि ठोस साक्ष्य रखे जाते हैं तो पुराने केस में मिली जमानत रद्द की जा सकती है। ऐसा होने पर अभियुक्तों के लिए दोबारा जमानत लेना आसान नहीं होगा।
अपराधियों की जमानत रद्द कराने की मुहिम वर्ष 2012 में शुरू हुई थी। तत्कालीन डीजीपी अभयानंद ने इसके लिए बजाप्ता एक टीम तैयार की। जिलों से वैसे अपराधियों की सूची मंगाई गई जो बार-बार अपराध में लिप्त पाए गए थे। उच्च न्यायालय में जमानत रद्द करने की अपील दायर की गई। अबतक 58 ऐसे बदमाशों की जमानत रद्द कराई गई है जो दोबारा अपराध में संलिप्त पाए गए। हालांकि जमानत रद्द कराने को 800 से अधिक प्रस्ताव तैयार किए गए थे।

