बिहार में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की सरकार ने बाल विवाह (Child Marriage) रोकने और दहेज प्रथा (Dowry System) को खत्म करने के लिए सभी मुखिया के कंधे पर एक नई जिम्मेदारी सौंपी है। विभिन्न मीडिया के अनुसार, बिहार सरकार ने एक निर्देश जारी करते हुए कहा कि यदि किसी गांव से बाल विवाह की सूचना मिलती है, तो संबंधित मुखिया (Mukhiya), जिन्हें ग्राम प्रधान कहा जाता है, को इस अवैध कार्य के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। जिला अधिकारियों को बाल विवाह रोकने में मुखियाओं की भूमिका के बारे में जानकारी देने के लिए भी कहा गया है।
पंचायती राज विभाग (Panchayati Raj Department) द्वारा जारी किए गए निर्देश के अनुसार, “यदि किसी विशेष इलाके से बाल विवाह की सूचना दी जाती है, तो स्थानीय स्वशासन के ग्राम-स्तरीय संवैधानिक निकाय द्वारा चुने गए संबंधित मुखिया को इस तरह के अवैध विवाह के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।” विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों से बाल विवाह निषेध अधिनियम को सख्ती से लागू करने को कहा है।
आमतौर पर मुखिया गांवों में विवाह प्रमाणपत्र जारी करते हैं। इसलिए, यह उनकी जिम्मेदारी बन जाती है कि वे अपने क्षेत्रों में बाल विवाह की जांच करें। बाल-विवाह व दहेज लेने-देने की सूचना मिलते ही संबंधित ग्राम पंचायत के मुखिया तत्काल इसकी सूचना बीडीओ और एसडीओ को देंगे और बाल-विवाह को रोकेंगे। अगर ग्राम पंचायत के किसी वार्ड में बाल-विवाह या दहेज़ प्रथा की शिकायत मिलती है, तो सरकार संबंधित पंचायत के मुखिया और वार्ड सदस्यों को हटाने के लिए भी कार्रवाई शुरू करेगी।
