देश के मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का आने वाले 24 जुलाई को कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसे देखते हुए निर्वाचन आयोग ने देश में राष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। चुनाव आयोग ने गुरुवार, 9 जून को राष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का ऐलान किया है। निर्वाचन आयोग ने इस ऐलान में बताया कि 18 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव किया जाएगा। इसके लिए 15 जून को अधिसूचना जारी की जाएगी।
निर्वाचन आयोग ने यह भी बताया कि 29 जून को नामांकन दाखिल किया जाएगा। 21 जुलाई को चुनाव के नतीजे आएंगे। आपको बता दें, भारत के राष्ट्रपति का चुनाव अनुच्छेद 55 के अनुसार आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के एकल संक्रमणीय मत पद्धति के द्वारा होता है। राष्ट्रपति को भारत के संसद के दोनों सदनों राज्यसभा और लोकसभा के अलावा राज्य के विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य 5 साल के लिए चुनते हैं।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 62 के अनुसार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 24 जुलाई को अपने 5 साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। और अगले राष्ट्रपति के लिए चुनाव इससे पहले हो जाना चाहिए। इसीलिए 18 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव होगा और 21 जुलाई को चुनाव के नतीजे सामने आएंगे।
पिछली बार 17 जुलाई 2017 को राष्ट्रपति चुनाव हुआ था। इसके नतीजे 20 जुलाई को सामने आए थे। उस वक्त करीब 50 फ़ीसदी वोट एनडीए (NDA) के पक्ष में थे। साथ ही क्षेत्रीय दलों में भी अधिकतर दलों का समर्थन मिल गया था।
आइए जानते हैं राष्ट्रपति चुनाव कैसे होता है ?
राष्ट्रपति चुनाव आम चुनाव जैसा नहीं होता। इसमें जनता सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लेती है बल्कि जनता ने जिन विधायकों और सांसदों को चुनते हैं वह राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेते हैं। एक और सांसद के वोट का वेटेज अलग अलग होता है विधानसभा के अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचन मंडल करता है। इसके सदस्यों का प्रतिनिधित्व अनुपातिक होता है यानी उनका सिंगर वोट ट्रांसफर होता है पर उनकी दूसरी पसंद की भी गिनती होती है।
लोकसभा राज्यसभा और विधानसभा के सदस्य मिलकर राष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचन मंडल बनाते हैं। 776 सांसद और विधानसभा के 4,120 विधायक कोख से निर्वाचन मंडल बनता है। निर्वाचन मंडल का कुल मूल्य 10,98,803 है।
राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लेने वाले सदस्य उम्मीदवारों में से पहले अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट डालते हैं। बैलेट पेपर में सदस्य बता देते हैं कि राष्ट्रपति पद के लिए उनकी पहली पसंद, दूसरी और तीसरी प्रशासन क्या है। अगर पहली पसंद वाले वोटों से नतीजा का नतीजे का फैसला नहीं हो पाता तो उम्मीदवारों के खाते में वोटरों की दूसरी पसंद के नए सिंगल वोट की तरह ट्रांसफर किया जाता है। इसी वजह से इसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट कहा जाता है।
अब आपको बताते हैं की राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने का अधिकार किसको है : संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य इसमें वोट डाल सकते हैं। क्योंकि विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भी इसमें वोट डाल सकते हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और संघ शासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा के सदस्य भी राष्ट्रपति चुनाव में अपना वोट डाल सकते हैं।
अब आपको बता देते हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में कौन हिस्सा नहीं ले सकता : इस बार लोकसभा या विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य इस में भाग नहीं ले सकते राज्यों के विधान परिषद के सदस्य भी इसमें भाग नहीं ले सकते।
