क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस का जन्म साल 1897 में हुआ था. उनका जन्म उड़ीसा के कटक शहर में हुआ. सुभाष चंद्र बोस के पिता कटक शहर के जाने-माने वकील थे. बोस को जलियांवाला बाग कांड ने इस कदर विचलित कर दिया कि वह आजादी की लड़ाई में कूद पड़े. दरअसल सुभाष चंद्र बोस की शुरुआती शिक्षा कलकत्ता के ‘प्रेज़िडेंसी कॉलेज’ और ‘स्कॉटिश चर्च कॉलेज’ से हुई थी. इसके बाद वह भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी के लिए इंग्लैंड गए. 1920 में उन्हें सफलता मिली और उन्होंने ‘भारतीय प्रशासनिक सेवा’ की परीक्षा उत्तीर्ण की.
सुभाष चंद्र बोस ने भारत के बाहर रहकर देश की आजादी के लिए कई काम किए. इसमें उनके आजाद हिन्द फौज की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. जब वह हिटलर से मिलने गए तो उन्हें एक कमरे में बिठा दिया गया. उस दौरान दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था और हिटलर की जान को खतरा था. अपने बचाव के लिए हिटलर अपने आस-पास बॉडी डबल रखता था जो बिल्कुल उसी के जैसे लगते थे. थोड़ी देर बाद नेता जी से मिलने के लिए हिटलर की शक्ल का एक शख्स आया और नेताजी की तरफ हाथ बढ़ाया. नेताजी ने हाथ तो मिला लिया लेकिन मुस्कुराकर बोले- आप हिटलर नहीं हैं मैं उनसे मिलने आया हूं. वह शख्स सकपका गया और वापस चला गया. थोड़ी देर बाद हिटलर जैसा दिखने वाला एक और शख्स नेता जी से मिलने आया. हाथ मिलाने के बाद नेताजी ने उससे भी यही कहा कि वे हिटलर से मिलने आए हैं ना कि उनके बॉडी डबल से.
इसके बाद हिटलर खुद आया, इस बार नेताजी ने असली हिटलर को पहचान लिया और कहा, ” मैं सुभाष हूं… भारत से आया हूं.. आप हाथ मिलाने से पहले कृपया दस्ताने उतार दें क्योंकि मैं मित्रता के बीच में कोई दीवार नहीं चाहता.” नेताजी के आत्मविश्वास को देखकर हिटलर भी उनका कायल हो गया. उसने तुरंत नेताजी से पूछा तुमने मेरे हमशक्लों को कैसे पहचान लिया. नेताजी ने उत्तर दिया- ‘उन दोनों ने अभिवादन के लिए पहले हाथ बढ़ाया जबकि ऐसा मेहमान करते हैं.’ नेताजी की बुद्धिमत्ता से हिटलर प्रभावित हो गया.

