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1 फरवरी को जारी केंद्रीय बजट में डाकघरों के माध्यम से देश में डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने की घोषणा की गई। इस डिजिटलीकरण के तहत सभी डाकघरों को कोर बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा जाना है। इसी के साथ आपको बता दूँ कि, कोर बैंकिंग सिस्टम से सभी डाकघरों को जोड़ने वाला बिहार, देश का पहला राज्य है।

जहां बिहार के सभी डाकघर दिसंबर से ही कोर बैंकिंग सिस्टम से जुड़ चुके हैं लेकिन डाकघरों के खाताधारकों को इंटरनेट बैंकिंग सेवा का लाभ मिलने में समय लगेगा। अभी डाकघरों के खाताधारकों को इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध है। जिसके तहत खाताधारक सिर्फ डाकघर की बचत योजनाओं में इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा का लाभ उठा पाते हैं। आने वाले समय में इस इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा सभी चीज़ों के लिए बहाल कर दिया जायेगा। और डाकघर के खाताधारकों को बैंकिंग की मूलभूत सुविधा का लाभ मिलने लगेगा।

इस योजना के तहत राज्य के 9 हजार डाकघरों के डेढ़ करोड़ खाताधारक मोबाइल से ही सारी तरह की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इस सुविधा के शुरू होने के बाद खाताधारक बिजली बिल, मोबाइल रिचार्ज, ई-मार्केटिंग से लेकर स्कूल की फीस हर तरह की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। साथ ही खाते से पैसे ट्रांसफर करने के लिए लोगों को अब अधिक मशक्कत नहीं करनी होगी। खाता चाहे बैंक में हो या डाकघर में लोग अब आसानी से मोबाइल और एटीएम से ही पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे।

राज्य में डाकघरों के ATM की भारी कमी है। राज्य में मात्र 40-50 डाकघरों के पास ATM की सुविधा है। जबकि डाकघर के खाताधारकों की संख्या डेढ़ करोड़ हैं। इसमें मात्र 5 लाख खाताधारकों को ATM कार्ड मिल सका है। आने वाले समय में इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के माध्यम से खाताधारकों को ATM Card देने की संख्या भी बढ़ानी होगी। जिसे लोग इसका लाभ आसानी से उठा सके।

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